KASHMIR: Love, Lust and LoC!!

वह भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और ब्रितानी हुकुमत के अन्तिम प्रतिनिधि वायसराय लुईस माउंटबेटन की खूबसूरत पत्नी एडविना थी जिनके बीच जो कुछ भी चल रहा था वह कभी कोई राज़ बनकर नही रहा।

एडविना मांउटबेटन की पुत्री पॉमेला की पुस्तक ‘इंडिया रिमेँमबर्ड’ भी इस तथ्य को और मज़बूत करनेँ के साथ साथ इसमेँ छुपे कुछ अनकहे अनछुए पलोँ से भी रूबरू कराती है।

एडविना लिखतीं हैँ कि पंडित जवाहर लाल नेहरू और लेडी एडविना के बीच आत्मीयता और प्रेम की शुरूआत 1947 में उस समय हुई जब परिवार और करीबी मित्रों के साथ दोनो मैशोब्रा नाम के हिल स्टेशन आउटिँग को गये थे। इस यात्रा से रोमांचित नेहरू नेँ इसके एक दशक बादभी एडविना को लिखे एक पत्र मेँ माना था कि मैशोब्रा की यात्रा के दौरान साथ बिताए समय ने ही उनकेँ संम्बधोँ को एक आधार दिया था, उन्होने यह भी माना कि वह इससे भलिभाँति वाकिफ हैँ कि यह संम्बध राजनीतिक ऊथल पुथल का सरमाया भी बन सकता है, मगर दिल पर किसका ज़ोर है, ऐसा लगता है कि कोई अंजानी शक्ति एक-दूसरे को हर हाल मेँ मिलाना चाहती है।

पॉमेला के अनुसार उन दोनो के बीच ऐसा कुछ नही था जिससे वासना जैसे शब्दोँ के प्रयोग को उचित ठहराना पड़े। जबकि मशहूर ब्रिटिश लेखिका कैथरीन क्लेमेट ने अपनी किताब ‘नेहरू एंड एडविना-ऐ नॉवल’ मेँ एडविना द्वारा अपने पति लुईस मांउटबेटन को लिखे पत्रोँ के हवाले से लिखा है कि पंडितजी और उनके संम्बध ‘केवल’ शारीरिक ही नही थे। इन दो लाईनो से तस्वीर शीशे की तरह साफ हो जाती है, और अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है।

हाँलाकि, इस विषय पर बुद्धिजीवियोँ के बीच हमेशा से बहस होती रही है, लेकिन अपने पत्रोँ मेँ खुद एडविना ने अपरोक्ष रूप से इसे स्वीकारा है. अगर गौर किया जाये तो यह प्रेम कथा भी एक प्रेम त्रिकोँण जैसी ही लगती है, जिसमेँ एक ओर अभी-अभी स्वतंत्र हुए भारत के प्रधानमंत्री थे तो दूसरी ओर अपना बोरिया बिस्तर समेटते ब्रितानी हुकुमत के अन्तिम वॉयसराय लार्ड मांउटबेँटन की पत्नी लेडी ऐडविना थीँ, और सबसे मज़ेदार तथ्य यह कि इन दोनोँ के बीच सैण्डविच बनेँ स्वंय वॉयसराय थेँ, यह सोचना बेमानी ही होगा कि वॉयसराय अपने भारतवास के दौरान गैर-राजनीतिक कार्योँ मे उलझ सकते थें।

यह बात न तो हैरान करने वाली है और न ही इसमेँ चौका देने वाली कोई खास बात है कि मांऊटबेँटन का रवैया नेहरू और एडविना की करीबियोँ को लेकर परेशान होने के बजाए सहयोग्यात्मक था। ऐडविना की पुत्री पॉमेला नेँ अपने पिता मांउटबेटन द्वारा अपनी बहन पैट्रीशिया को लिखे एक पत्र के हवाले से किताब मे लिखा है कि “वह (ऐडविना) और जवाहरलाल की जोड़ी बहुत खूबसूरत लगती है, वह दोनो एक दूसरे पर फिदा है। पैँमी (पॉमेला) और मैँ उन दोनो की हर संम्भव सहायता करने की कोशिश कर रहे है।” पॉमेला के अनुसार यह तिकड़ी एक मज़बूत विश्वसनियता की डोर से जुड़े थे। वॉयसराय का ऐसा व्यावाहार फिल्मी दिखता है, या हो सकता है वह ऐडविना को किसी भी कीमत पर खुश देखना चाहते हो ऐसा माना जाता है कि नेहरू ऐडविना को 1948-60 तक हर रात एक पत्र जरूर लिखते थे, उस समय नेहरू की मानसिक स्थिति क्या रही होगी केवल अंदाज़ा ही लगाया जा सकता है क्योकि उन्होने कभी भी दूसरोँ को अपनी मनो:स्थिति से अवगत नही कराया था। नेहरू का 12 वर्षो तक प्रतिरात्री ऐडविना को पत्र लिखनेँ का तथ्य तब सामनेँ आया जब ऐडविना नेँ अपनी वसीयत मेँ नेहरू के पत्रोँ सेभरा एक भारी भरकम ब्रीफ़केस छोड़ा- अपनेँ पति के नाम. यह भी एक रोचक पहलु है कि नेहरू कभी भी अपनेँ निजी जीवन से संतुष्ट नही हो सके। उनकी पत्नी कमला और स्वंय उनकी जीवन शैली मेँ ज़मीन-आसमान का फर्क रहा था, इसके अलावा कमला का अक्सर बीमार रहना जब तक कि 1939 मेँ उनका देहान्त नही हो गया; और इसीलिए नेहरू मेँ एक भावात्मक अंसन्तुश्ति हमेशा से ही रही थी, जब तक कि उनकी मुलाकात ऐडविना से नही हो गई।

नेहरू को ऐडविना मे वह सारे गुण दिखे जो उनके जैसे स्तर के पुरूष सामान्तय: चाहते है; नेहरू ऐडविना पर पूर्ण विश्वास करते थे जबकि स्वंय पॉमेला के अनुसार नेहरू से मॉ का सम्बंध उनका कोई पहला विवाहोत्तर सम्बंध नही था।

इन सब के साथ-साथ भारतवर्ष के लोगोँ को हमेशा से यह सवाल मथत्ता आया है कि क्या इस हाई प्रोफाईल प्रेम ने भारतीय हितो की अनदेखी भी कभी की है? इसे इस एक तथ्य से समझा जा सकता है कि नेहरू ने माँउटबेटन की काश्मीर मुद्दे को 1 जून 1948 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिती को प्रेषित करनेँ की गैरजरुरी सलाह को मान लिया, जब कि भारत उस समय ऐसी स्थिति मे था कि वह पाकिस्तानी घुसपैठियोँ को रातो-रात काश्मीर से खदेड़ सकता था।

That is how we lost half Kashmir to Pakistan and given a LoC in our own territory, all for a extramarital selfish love.

Nehru and Edwina

edwina

nehru

Nehru

nehru

nehru love

Edwina Nehru

nehru edwina


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About Shabab Khan

A Journalist, Philanthropist; Author of 'The Magician', 'Go!', 'Brutal'. Being a passionate writer, I am into Journalism and writing columns, news stories, articles for top media house. Twitter: @khantastix khansworld@rediffmail.com
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