Are they Manipulating Our Judiciary?

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…Daud Ibrahim, son of a police constable basically belongs to Dongri Area of Mumbai has ambition to be a bigger Don than the then Don Haji Mastaan. And, he did whatever it required, he secured Don’s kingdom but ironically lost his country. Master Mind of Mumbai 1993 blast.


नई दिल्ली: 21st July 2015; समय 1:40 मिनट, सुप्रीम कोर्ट का जजेस् च़ैंबर, मौका मृत्युदण्ड पाये 1993 मुंबई बम धमाके के आरोपी याकूब मेमन की जान बचानें का अंतिम कानूनी प्रयास.

क्युरेटिव पेटिशन: जो कानूनी महायुद्ध का किसी हार्श सजा से बचनें का आखिरी हथियार होता है, यहां मौत की तारीख तक तय किये जा चुके आरोपी याकूब मेमन की यही याचिका पेश हुयी, काबिल जज H.L. Dattu की पीठ के सामने| ठीक चार मिनट बाद 1:44 बजे यह तय हो गया कि 20 वर्षों से जेल मे सड़ रहे याकूब मेमन को पहले से महाराष्ट्र सरकार द्वारा तय 30 जुलाई को नागपुर जेल में सुबह सात बजे फांसी पर लटका दिया जायेगा|

… “त्रासदी बिन बुलाये मेहमान की तरह बस यूँ ही नही आती, वो कई छोटी-बड़ी… मगर ऐसी कई महत्वपूर्ण घटनाओं का तानाबाना होती है जो आपस मे मिलकर ऐतिहासिक तुफ़ान का कुरूप चेहरा दुनिया के सामने लाती है… और हम माटी के पुतले सोचते ही रह जाते है कि यह कैसे हुआ!”

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…Tiger Memon is Daud Wazir, he had been given the responsibility of seeking vengeance of Muslims’ killings in Mumbai Roits.


ग़ौरतलब है कि <6 Dec 1992 को उत्तरप्रदेश के तब के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के संरछण में मुख्य रूप से लाल कृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कटियार, तोगड़िया, सुषमा स्वाराज और भाजपा – राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ- विश्व हिन्दु परिषद के अलगावादी विष से भरे अज़दहों ने भारतीय निम्नवर्ग तथा निम्न-मध्यम वर्ग के बेरोज़गार, बेगार उत्पाती युवकों को हिन्दुत्व के नाम पर इतना बरगलाया कि सारे भारत से बिना टिकट बेकार युवक केसरिया साफ़ा बांधकर भारी तदाद में अयोध्या के लिये कूच कर गये, रास्ते मे मिलने वाले केले के ठेले, जलेबी-पकोडियों की दुकानें, बेकरी, कोल्ड ड्रिंकस् की दुकानों को पिरहाना मछली के झुण्ड की लूटते हुये… रिजर्वेशन कराये यात्रियों को खींचकर ट्रेन से बाहर निकालते, इन लकड़बग्घों का हुजूम…जिन्हे कारसेवकों का नाम दिया गया था, अयोध्या पहुँच गया मय फावड़े, कुदाल, खुरपी, रॉड, डण्डा, कुछ नही तो दो फुटे लोहे का टुकड़ा ही सही|

अयोध्या, जो उस दिन विश्वपटल पर था| वहां कारसेवकों का कोई प्रतिरोध नही हुआ, सर पर टोपी, हाथ में चापड़ थामें मुस्लिमों की फ़ौज, जो आज ही के दिन अयोध्या पहुँच कर मस्जिद की हिफाजत करने को कटिबद्ध थे| टकराव के हालात बनते देख कल्याण ने मुस्लिमों को मस्जिद बचानें के लिये अयोध्या न जाने को कहा था, उस धोखेबाज़ मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया था कि यदि किसी दल ने विवादित परिसर में घुसने की कोशिश की तो एक वर्ष पहले मुलायम सिंह की तरह वो भी उत्पातियों के झुण्ड पर गोलियां चलवा देगें| जबकि वहां कोई रोकटोक भी नही थी| गिनती के पुलिसवाले कारसेवकों को बाबरी मस्जिद का पता बताते देखे गये|

हमारे शान्तिप्रिय भाजपाई कारसेवको को गाईड करते मिले| 'नजायज़' भारतरत्न अटल बिहारी बाजपई उदारवादी चोंगे के बाहर केसरिया जामे में बोलते सुने गये, “ नया निर्माण करने के लिये भूमि को समतल करना ज़रूरी है”; इस विवादित मुद्दे को कवर करने मीडिया जगत के दिग्गज अयोध़्या मे डेरा डाले थे| उन्होने जैसे ही वास्तुस्थिति को क्लिक करना शुरू किया, भीड़ पत्रकारों पर टूट पड़ी, किसी भी कीमत पर यहां की फोटो बाहर न जाने पाये… यह संदेश लाऊडस्पीकर पर महिला की कर्कश आवाज में गूँजा था| मगर जो हार मान जाये वो पत्रकार कहां का?

image …Direct from the core of all the disputes.

image… An unending ocean of volunteers or karsewaks is being addressed by motivators before they start digging the Babri Mosque.

image …Riding on the dome of mosque’s photo was the most disturbing visual for a Muslim.

दुनियाबी चकरघिन्नी के बहार इलाहाबाद में दो बिन्दास किशोर रिन्कु और मैगनेट (शबाब ख़ान) वहाँ के सबसे बेहतरीन थियेटर चन्द्रलोक में 20-30 लोगों के साथ पसरे करिश्मा कपूर की डेब्यु “प्रेम कैदी” फ़िल्म देख रहे थे, साथ ही साथ करिश्मा का रिव्यु (फिल्म का नही) भी जारी था| “न चली बे! बहुत ज्यादा गोरी है” रिन्कु का कमेंट आया| “सूतिया हौ क्या बे, ऐक्टिंग अच्छी है, बाद में एक्सपोज़ करिगा तो हिट होगी|” शबाब का रिप्लाई था| रिन्कु पेपसी का घूँट अंदर करता हुआ बोला, “अबे ठेगा एक्सपोज़ करिगा, क्या है इसके पास जो ऐक्सपोज़ करिगा?” मेरे यानि शबाब ख़ान के जवाब देने से पहले …सिनेमाहाल का सेवेन्टी एमएम पर्दा अचानक रंगीन से बेरंग हो गया, रिन्कु बोल पड़े, “अबे कै बार इंटर होगा”| मुझे जवाब सूझता उससे पहले हॉल कर्मचारी चीख़कर बोले, “आप लोग जल्दी घर जायें… बाहर कर्फ्यु लग गया है|” मेरे दिमाग़ में एक ही बात कौंधी, “बाबरी मस्जिद गयी|”

बाहर सड़क पर आया तो गोया सन्नाटा कुछ युँ पसरा था जैसे शहर की मांग उजड़ गयी हो, बाईक रिन्कु चला रहा था… हर थोड़ी दूर पर पुलिस बैरिकेटिंग कर रही थी, उनके पास से निकलते तो घूरते पुलिसिये को मैं भी घूरता़… हिदुंओं की हर गली, नुक्कड़, चबूतरों, मुहल्लों में लोगों के छोटे छोटे गुट खड़े दिखाई दे रहे थे, सबके चेहरे वीरान …ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मस्जिद नही मंदिर टूटा हो|

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बहरहाल हम सिंगल पीस अपने मुहल्लों मे इंट्री कर गये, यानि मुस्लिम ऐरिया में, यहाँ का माहौल रोंगटे खड़े कर देने वाला था. हजारो की भीड़ हाथों मे पिस्टल, कट्टा, राइफल, टुएल्व बोरड, सुतली बम, तलवार, चापड़, छुरे, कुल्हाड़ी जैसे घातक हथियार; मुँह पर मस्जिद शहीद हो गयी, अल्लाह हो अकबर… यह भीड़ बढ़ रही थी पड़ोस के हिन्दु मुहल्लें की ओर|

बीबीसी लगातार बता रहा था कैसे सरकारी मशिनीयरी का दुरोप्योग कर विवादित ढ़ाचें को अनपढ़ देहाती उन्मादी जनता को बरगलाकर एक विवाद को और जन्म दे दिया गया; सब जानते हैं एक मुस्लिम के लिये मस्जिद का टूटना क्या होता है| हिन्दु अतिवादी भीड़ के हथियार मस्जिद पर पड़ने लगे… पाँच घण्टों तक दीवारों ने ज़मीन नही छोड़ा; जैसे ही विश्व में बाबरी के गुंब्बद पर चढ़े केसरिया भीड़ की फोटो दुनियाभर की मीडिया ने रिलीज़ किया… उसके ठीक तीन घण्टों में करीब चार हजार मंदिरें पुरे विश्व में तबाह हो चुकी थी, भारत मे हिंदुओं का जमवाड़ा ठीक… मगर विश्व में मुस्लिमो की गिनती भारत की जनसंख्या से ज्यादा है| ऑयरलैण्ड, इंग्लैड़, सिडनी, इटली, ऊटाह, अफ़रीका, न्युयार्क, ओख्लाहोमा, पेनसेलवानियॉ, ऑरिजोना, कनाडा, नारवे, मलेशिया, म्यानमार, ढाका, श्रीलंका, मॉलद्वीवस ….में जो भी मंदिर थे उसे लोकल मुस्लिमों ने मिट्टी मे मिला दिया, यह प्रतिक्रिया इतनी बड़ी थी कि कल्याण सिंह को पद छोड़ना पड़ा और फिर से लाख प्रयास के बावजूद वो डॉयरेक्ट राजनीति में कभी न आ पाया,उसकी जगह जो दूसरा राजनीतिज्ञ चेहरा सामने आया वह हर मायने मे कल्याण से बेहतर था… मायावती नाम है उस तेज़तर्रार महिला का |

अडवाणी जैसा विलेन जिसने अपने ही देश में आग लगाई थी …यह सुनकर सन्न रह गया कि सऊदी, कुवैत, क़तर ने भारत को एक भी बुँद पेट्रोलियम निर्यात न करने का फैसला किया है, यूएस ने भाजपा के किसी भी नेता को अपने यहाँ बैन कर दिया, ईरान ने कुकिंग गैस की सप्लाई रोक दी… मतलब साफ है कि जिन्होने मस्जिद तुड़वायी वह सबसे बड़े देशद्रोही निकले, यही वो लोग थे जिन्होने अंग्रेज सरकार से चंद्र शेखर आजाद की लोकेशन इलाहाबाद का अल्फ़ेड पार्क बताया था, क्या अब भी बताँऊ कि गद्दारों का गिरोह सत्ता सुख के लिये अपनी मॉ का सौदा भी कर सकता है|

उधर मुंबई के हिन्दु और मुस्लिम आमने सामने आ खड़े हुये, दोनो गुट हथियारबंद; तलवारें, चापड़, गुप्ती, त्रिशूल, ईंट-पत्थर, पेट्रोल बम से लैस| “जय श्रीराम …हर हर महादेव… मारों|”
अगले ही पल “नारा ए तक़बीर – अल्लाह हु अकबार … हम शहादत ए बाबरी के लिये खून की नदियां बहा देगें| और ..फिर चला वहशत का दंगा|

पुलिस फ़ोर्स डिप्लॉय की ग़यी, बिना सोचे की पुलिस के जवान भी इसी भारत की पैदाईश है.पुलिस ने शिव सैनिको का काम आसान कर दिया| सो मुस्लिम को कुचलकर रख दिया गया, शिवसेना ने जमकर उत्पात मचाया|

उधर दुबई में दाऊद इब्राहिम को तबाही का ऐसा मौका मिला जिससे उसकी पकड़ मुँबई पर और मजबूत हो जाती… इंतकाम की ढाल के पीछे से मुँबई को एक झटके मे ऐसा तबाह करो कि बाहर रहकर भी मुँबई पर राज किया जा सके|

शिव सेना और मुस्लिमों की जंग में बाहर गांव से मुंबई आकर बसे छोटे कामगारों की भूखों मरने की नौबत आ गयी, लेकिन लाशे गिरती रहीं वक्त चलता रहा; लोगों से ठसाठस भरी चॉल को आग लगी, बाशिंदे निकलकर भागे तो भीड़ ने निकलने नही दिया, दंगे जब कंट्रोल मे आये तो गैरसरकारी आंकड़ों मे करीब दस हज़ार जाने जा चुकीं थी|

इन सब घटनाओं को बीच हमारे बाबा के पास से एक अदद AK 56 असाल्ट राईफल मुंबई क्राईंम ब्राँच ने बरामद किया, बाबा यानि संजय दत्त से जब “राईफल क्युँ” पूछा गया तो जवाब मिला “बस युँहीं शौकिया”… क्राईम ब्रांच ने भी बस युँ ही बाबा को टाडा में बुक कर दिया|
* * *
पाकिस्तानी ऐंजन्सी ISI ने डॉन को बदला लेने का ब्लुप्रिंट दिया| 1993 January तक प्लान पर काम होता रहा, जिसे दाऊद के कहने पर टाईगर मेंमन लीड कर रहा था, उसके घर से ही सारी त्यारियां हो रही थी, टाईगर ने मुंबई से बारह युवकों को ट्रेनिग के लिये पाक भेजा था जो वापस आकर सिर्फ ईशारे का इंतजार कर रहे थे| सऊदी में बस चुके भारतीय और पाकिस्तानी पूंजीपति नें फ़डिंग की जिसमे से अहमद सुलेमान, खालिद ज्टी जैसे कई लोग थे.. विदेश से आने वाली मुद्रा को निर्यात से आयी दिखाकर चार्टर्ड अकांऊनटेंट याकूब मेंमन ने RDX, कारें, स्कूटर, डेटोनेटर के लिये टाईगर को फंड उपलब्ध कराता रहा, अय्यूब मेमन ने जगह चिन्हित करके लड़को को फाईनल प्लान समझा दिया, मुंबई 6 अप्रैल को जख्मी होनी थी, मगर बारह में से एक युवक शक के आधार पर अरेस्ट हो गया, टाईगर ने तुरन्त फैसला लिया की अब और रूकना ठीक नही, पाकिस्तान मे बैठे डॉन ने आईएसआई से कंसल्ट करके ऐक्शन की तारीख़ 12 Mar 93 को तय कर दिया|

March 12th, 1993: मुंबई!

आज का दिन भी सामान्य था, बिना थके तेज़ और तेज़ भागता समय, और समय से टक्कर लेता यह शहर, लेकिन दंगों के निशां अभी भी काली जल चुकी चाल, दोनो पैर से गया शंकर, रास्ते मे आग से खेली कई बसे, दुकाने …सब कमबख़्त दिखायी देता है| बंबई स्टाक एक्सचेंज में मंदी की मार थी, ब्रोकर रथ और यात्रा दोनो को गरिया रहे थे, बिल्डिंग की बेसमेन्ट मे घड़ी ने जैसे ही 1:30 किया …बीच की रो में पार्क की गयी इस्टीम मे भूकम्प को मात देता धमाका हुआ और पल भर मे 55 बेकुसूर लोगों की हड्डियां अलग और मांस अलग| फिर दहशत, सॉयरन एम्बुलेंस का, पुलिस की गाडियो का …अभी प्रशासन कुछ समझ पाता कि उनके वॉयरलेस बजने लगे… धमाका जुहू सेटुर होटल में… आधे अधिकारी फ़ोर्ट ऐरिया यानि स्टॉक एक्सचेंज …अाधे सेंटूर होटल जुहू की ओर|

ज़ावेरी बाज़ार पर बम धमाकों की कुछ खास कृपादृष्टि रही है, तीसरा धमाका इसी जगह हुआ… लाशों के ढ़ेर में कौन हिंदु, कौन मुस्लिम! मुंबई की रफ्तार अचानक रूक गयी, हर गाड़ी मे प्रशासन को बम दिखायी देने लगा.. सेंटूर होटल सहर एयरपोर्ट पर अगला धमाका, होटल सीरॉक के रूम में, शिव भवन, एयर इडिया बिल्डिंग, माहिम कॉज़वे …कुल तेरह ब्लास्ट ने 257 जाने ले लिया ,670 लोग घायल, 100 के करीब अपाहिज… यह गुनाह ए अज़ीम था, सब के सब बेकुसूर. इन धमाको के बाद अंडरवर्ल्ड नें कहा यह इंतकाम था|

गौर करने वाली बात तो यह थी की पूरी मेंमन फ़ैमली धमाको से पहले ही काठमाण्डु होते हुये कराची की शरण में पहुंच गया था| लेकिन कराची मुँबई नही हो सकती. टाईगर तो दाऊद भाई के साथ किसी न किसी गैरकानूनी मे मसरूफ रहता, याकूब के लिये कराची सिर्फ छिपने की अड्डा था| उधर मुँबई को सिक्योरिटी एजेंसी उलट पुलट के जांच मे लगी थी, जल्दी ही इंडियन एजेंसी को सुराग मिल गया कि दाऊद ने मँबई ब्लास्ट टाईगर के ही सुपुर्द किया था जिसे उसने शानदार तरीके से अंजाम दिया था; जल् दी ही पुलिस को पता चल गया कि मेंमनस् पाकिस्तान शिफ्ट कर गये है|

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भारत ने पाकिस्तान से धमाकों के दोषियों को हवाले करने को कहा, लेकिन मक्कार पाक “नो वी डोन्ट हैव इंडियन गैंगस्टर” जैसी रट सैटेलाईट ट्रैकिंग एण्ड इमेजिंग जैसी टेक्नोलॉजी के बाद भी लगाई हुयी है; पाकिस्तान मे अंडर कवर रॉ ऐजेंट श्री बी रमन और पाक में मौजूद उनकी टीम के रॉ स्पाई, वो जांबाज़ भारतीय है जिन्होने याकूब मेंमन को कराची में ढ़ँढा, उससे सम्पर्क किया और कराची में याकूब मेंमन से मिलकर उसे आत्मसमर्पण के लिये तैयार किया| भारत सरकार की ओर से रमन ने याकूब को विश्वास दिलाया कि चूँकि याकूब को साजिंश के बारे में मालूम था इसलिये उस पर कानून कार्यवाही तो होगी ही लेकिन मौत की सजा नही होगी यह भारत सरकार का रमन के माध्यम से याकूब से किया गया वादा था… जो अतत: टूट गया |

याक़ूब के साथ उसका परिवार भी काठमान्डु पहुँचा जहाँ रॉ ऐजेन्टस उनका इंतजार कर रहे थे, एक प्राईवेट प्लेन से सब दिल्ली पहुँचे. अगले दिन दिल्ली पुलिस को ट्रेंन स्टेशन पर याकूब फ़रार होेने के लिये किसी गाड़ी का इंतजार करता मिल गया, यह 1993 की घटना है; तब से आजतक जेल मे ही याकूब के दिन कटे हैं, लगभग 20 साल जो भारतीय कानुनासार उम्र कैद (14 वर्ष) से भी अधिक है; जबकि याकूब द्वारा दी गयी जानकारी से ही मुँबई पुलिस ने आसानी से 26 अभियुक्तो को गिरफ्तार करा था | ट्रायल टाडा अदालत में शुरू हुआ, पब्लिक प्रासिक्युटर उज्जल निकम नें अदालत को ऐसी तस्वीर दिखाई कि टाडा अदालत नें 15 अभियुक्तो को आजीवन कारावास दे दिया तथा 11 को सज़ा-ए-मौत की सजा सुनायी… इन 11 में याकू़ब मेंमन भी था, तो क्या रॉ ने अपना वादा नही निभाया …जवाब अभी भी आना बाक़ी है |

मौत की सज़ा पाये अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, कई वर्षों के बाद केस ट्रायल में आया. सुनवायी हुयी, बहस हुयी… साथ साथ समय भी हदें पार करता रहा | अतत: फ़ैसला आया, “डिलेयड जजमेंट” के कारण 10 अभियनक्तों का मुत्युदण्ड सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदल कर राहत दे दी | लेकिन यही राहत याक़ूब मेंमन काे नही दिया जबकि इसके चार्जेज़ बाकियों से कम थे ; कोर्ट का कहना था कि ऐडुकेटेड होने के कारण याकूब का इंफ्लुएंस युवको पर ज्यादा था | अतत: याकूब ने राष्ट्रपति को दया याचिका प्रेषित किया …राष्ट्रपति ने स्वाभाव के विपरीत याकूब मेंमन की मरसी पेटिशन को इतनी जल्दी खारिज किया कि ऐसा सोचना स्वाभिक है कि “क्या प्रणंव मुखर्जी ने पहले ही मन बना लिया था कि याकुब को मृत्युदण्ड देना ही है|” और तो और जैसे ही केन्द्र को मरसी पेटिशन खारिज होने की फाईल मिली… उसने महाराष्ट्र सरकार को भेज दिया|

और… इसलिये महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नीस ने याकूब की फांसी की तारीख़ 30 जुलाई को 7 बजे नागपुर जेल में तय कर दिया… यह देख 20 जुलाई को याकूब के वकीलो ने सुप्रीम कोर्ट में क्युरेटिव पेटिशन पेश किया जो सिर्फ 4 मिनट मे खारिज कर दी गयी |

आज यानि 30 जुलाई को केवल एक घण्टें मे याकूब को सूली पर चढ़ा दिया जायेगा| सारी रात सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति से याकूब को मृत्यदण्ड न देने की अपील की जाती रही, वकीलो ने फ्रेश मरसी पेटिशन दाखिल किया… रात दो बजे तक सुनवाई चली; मगर रिजेक्शन का याकूब का शायद चोली-दामन का साथ है. मोदी सरकार ने मेंमन की इस बार की मरसी पेटिशन को भी रिजेक्ट करने का सुझाव राष्ट्रपति को दिया, गृहमंत्री राजनाथ खुद फाईल लेकर राष्ट्रपति भवन गये और… अतत: प्रेसिडेंट ने इस दया याचिका को भी खारिज कर दिया …इस तरह रात तीन बजे यह तय हो गया कि अभी कुछ घण्टों में सीए याकूब मेंमन की सांसें थम जायेगी | याक़ूब को रात 3 बजे नागपुर जेल सुपरिटेन्डेन्ट ऑफिस बुलाकर जानकारी दे दी गयी कि, “आपकी दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया हैै.” सेल लौटते समय दूसरे बैरेको के बंदी पूछने लगे कि उसका क्या फैसला आया! जवाब में याकूब ने कहा कि, “भाईयों कहा सुना माफ करना… मुझे सुबह जाना पड़ेगा!” आखिरी इच्छा पूछे जाने पर याकूब ने अपनी बेटी ज़ुबैदा से फोन पर बात करने की इच्छा जतायी जो उसे प्रदान कर दी गयी |

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Devender Pal Singh Bhullar dodged the Death Penalty for life term. He will be out on Parole soon, says his wife Karamjeet.<b

देवेन्द्र पाल सिंह भुल्लर, जिसने 1993 में ही दिल्ली में रायसाना हिल के पास RDX भरी कार को इसलिये उड़ाया ताकि एक एंटी खालिस्ताान सरदार को मार सके, वह सरदार तो नही आया लेकिन नौ राहगीर जरूर मारे गये; आज भुल्लर अमृतसर के एक अस्पताल में बीवी के हाथ से बना खाना खा रहा है| डिलेयड जस्टिस …के आधार पर अाखिरकार फांसी से भुल्लर ब़च गया; मानसिक बिमारी के आधार पर उसे अस्पताल में रखा गया है जहं भुल्लर की पत्नी घर से कभी शाही पनीर, कबाब, कभी बटर चिकन लेकर आती है | एक और बात, देवेन्द्र की पत्नी जल्दी ही पैरोल के लिये अप्लाई करने जा रही है. यानि इस कार में RDX रखकर उसे उड़ा देने वाले को जल्दी ही खुली हवा में सांस लेनें की आज़ादी मिल जायगी |

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चलिये, एक और केस के बारे मे बताता हूँ, बेअंत सिंह 1995 में जब पंजाब के मुख्यमंत्री बनें तो खालिस्तान प्रोजेक्ट में लगें आंतकवादियों को आत्मसमर्पण करने की हिदायत दी, लेंकिन हथियारों से लैस खालसा को फर्क नही पड़ा, और यही गलती थी. बेअंत की लीडरशिप मे पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स चरमपंथी की जड़ काटने में लग गयी| जाहिर है, खालसापंथ हड़बडाकर गलत कदम उठायेगा, वही हुआ…

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खालिस्तान मुहिम मे लगें थिंकटैक ने प्लान बनाया …राज्य के मुखिया बेअंत सिंह को मारने का, जो पाँच कमांडों से हमेशा घिरे रहते थे | अगस्त 31, कों वह चंड़ीगढ सिक्रेटिऐट कॉम्पलेक्स में थे, तभी दलबीर सिंह जाकर मुख्यमंत्री के सामनें जाकर खड़ा हो गया, सिक्योरिटी में लगे कमॉडो रिऐक्ट करते इससे पहले अात्मघाती हमलावर दलबीर ने अपनी क़मर में बंधे विस्फोटक को डेटोनेट कर दिया |

इस हमलों में बलवंत सिंह रसोना कु़छ दूर खड़ा था, उसनें पुष्टि करा की मुख्यमंत्री के चिथड़ो उड़ गये है, फिर वहां से घर आया, अपनी विस्फोटक वेस्ट को निकाला और दूसरे काम मे लग गया; जी हाँ, इस ऑपरेशन में रसोना बैकअप के रूप में गया था, यदि दलबीर चूक जाता तो बलवंत खुद को ब्लाल्ट करके काम पूरा करता | बाद मे मुखबिर की सू़चना पर बलवंत पकड़ा गया, मौ़त की सजा मिली तो सही लेकिन अकाली दल के धरने प्रदर्शन ने उसको मृत्युदड को आजीवन कारावास में तबदील कर दिया गया |

… अब आप स्वंय तय करें कि कैसे दोगलेपन से याकूब मेंमन को इतने प्रयास के बाद भी जान बचाने की हर वजह, हर तर्क को पैरों तले कु़चल दिया गया | क्या अब कोई दूसरा गुनाहगार भारतीय एजेंसी पर विश्वास करेगा ?

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–शबाब खान
(द टाईम्स ऑफ इंडिया – रिसर्चड स्टोरी)
आईरा – ऑल इंडिया रिपोटर्स एसोसियशन
(राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी)
Disclaimer: Personal Opinions, not to offend anybody.

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About Shabab Khan

A Journalist, Philanthropist; Author of 'The Magician', 'Go!', 'Brutal'. Being a passionate writer, I am into Journalism and writing columns, news stories, articles for top media house. Twitter: @khantastix khansworld@rediffmail.com
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