महादेव और पुलिसदेव …

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Bennet & Coleman’s Publication
लखनऊ संस्करण  |  9.11.2015


— शबाब ख़ान (वाराणासी से स्टॉफ़ लेखक)

वाराणासी: यह शिव नगरी है, महाश्मशान यहां की गंगा के किनारे प्राचीनकाल से है. हरीशचंद और मनिकर्णिका घाट… जहां हर समय, चौबीस घंटों के हर पल में यहां लपटों से कोई न कोई घिरा रहता है …कभी किसी ने इस घाट कोे नही देखा जब यहां कोई चिता न जल रही हो. हिन्दु विद्वानों का कहना है कि जो अग्नि यहाँ चिता जलाती है वही अग्नि हजार वर्षों से रामायाण काल से जलती आ रही है जो डोमराजा के परिवार के पास है जिसे उन्होनें अाजतक बुझनें वही दिया. किसी अपने की चिता सजाकर पवित्र अाग डोम के परिवार से कुछ पैसे में खरीदकर लाया जाता है, और उसी से मरने वाले को जलाया जाता है, यह सिलसिला पिछले 3500 वर्षों से जारी है; बनारस इकलौ़ती प्रा़चीन सभ़्य़ता है जो जीवित है; आगे भी रहेगी, गारण्टी नही|

काशी महादेव की है लेकिन इसकी बागडोर पुलिस देव की है, महादेव पार्वती से बूटी पिसवाकर रोलर-कोस्टर मे चकरघिन्नी बने रहते है, और ख़ाकी देव त़ो, “सुबह भी ले लो शाम भी ले लो …रात को भर लो झोली.”

गंगानगर कॉलोनी: भदऊं चुंगी के पास गंगा से कुछ दूरी पर वाराणासी विकास प्राधिकरण नें 1980 के दशक में शांत क्षेत्र में इस पॉश कॉलोनी को बनवाया था, कारण शहर की हदे ट्रिम करके भदोही, गोपीगंज, चंदौली को दे दिया गया, इससे प्रदेश सरकार को लगा कि बनारस पर से जनसंख्या का बोझ कुछ कम हो जायेगा लेकिन वो भूल गये कि महादेव काशी में ही निवास करतें है, और प्रयास के बावजूद बनारस के बाशिंदे बढ़ते गये, सड़के लोगो के ड्राईगरूम में चली गयीं, फ़ुटपाथ दुकानों, शोरूम में लुप्त हो गयी, बची खुची जगह पान की गुमटियों, हर माल 10रू, भोला कचोड़ी की फेमस दुकान, गंगा लस्सी शॉप, गोलगप्पे के स्थाई ठेलों के नीचे कही समा गयी. यकीन करना मुश्किल है लेकिन सच यही है कि बनारस की हर दुकान अपनी वैध सीमा से बाहर पैर फैलाये है, उसके आगे कुल्फी वाला गर्मीयों में और सकोड़े वाला जाड़ो में ठेला लगाता है, और पीछे के पैर बाहर निकाले दुकानदार को दो-तीन सौ महीना देता है|

बहरहाल गंगानगर वासी भी त्रस्त हैं, क्योकि पुलिसदेव महादेव को भांग गटियाते देखे तो मैरियाना ट्रेच से भी गहरी जेबे भरने निकल पड़े. गंगानगर के सामनें मेन रोड़ को कैंसर हो गया है कि कमबख्त लाख बार पैचिंग कराओ लेकिन दो दिन मे ही क्या सड़क क्या नीचे से बाहर निकलकर खीसे निपोरतें पत्थर के टुकड़े. वजह साफ है रात हो या दिन प्रतिबंधित भारी ट्रकें, ट्रेलर, सेमाई, ऑयल टैंकर… पुलिसईया भाषा में चार चक्का, छ:चक्का, 10-12 चक्का ट्रक लगातार कॉलोनी के सामने वाली रोड पर से आती जाती रहती है. कुछ दूरी पर सेवई मंडी है जहां ईद और बकरीद में मैदा भरी ट्रके या फुल लोड सेवई भर कर गैर जनपदों को जाने वाली ट्रकें. अ़़च्छा है व्यापार बढ़े, प्रगति का फायदा सबको मिले, खाली पुलिसदेव की जेबे गर्म रहेगी तो प्रॉब्लम होना तय है|

उधर चौहट्टा लाल खान में लगा ट्रांसफारमर एक ही साल में दूसरी बार जल गया, जलने का मतलब उसमें आग लग गयी,  वो भी इतनी भीषण की ऊपर फॉरबिडन गूलर की मोटी शाख ने आग पकड़ ली और चौबिसों घण्टों जलती रही, टॉस्फार्मर मे आग इस बार भी सुबह तीन बजे लगी, समझ मे नही आया कि दिन मे या रात में लोड जब ज्यादा होता है तब कभी आग वाग नही लगी …सुबह जब लोड कम होता है तो दुर्घटना, यह विश्व की पहली जगह है जहां लोड कम होते ही टांस्फार्मर धू धू करके जल उठता है, वाह|

शहर में ई-रिक्शों की भरमार है, इसमे 12V की चार बैट्री लगी होती है, जिन्हे चार्ज होने में 14 घण्टे लगते है, बिजली कितनी खर्च होती है पता नही लेकिन जहाँ तक बनारसी मानुष को मै समझता हूँ, ऐसा कोई ऑटो वाला नही होगा जो ईमानदारी से घर के सॉकेट मे ऑटो चार्जिग का प्लग लगाये. सारी कमाई बिजली बिल अदा करने मे ही चली जायेगी. अजब गजब है बनारस की जनता …बिजली को खर्च मे शुमार ही नही करते, औऱ यह इस पॉश कॉलोनी में करोड़पति व्यापारी और आईपीएस पर भी लागू है मैने देखा है रात मे घर के चार एसी कटिया मारकर ही चलते हैं|

गलियों में पैदल चलना आपको ऐरोबैटिक्स एक्सपर्ट बना देगा… सामने से आते रिक्शे के बगल में बाबा जी भी चले आ रहे है, आपके आगे आगे तीन लुंगी छाप लोग पैदल बाते करते चल रहे हैं वो भी हॉरीज़ेंटली… आपको अपने पैर से बीच वाले की ऐड़ी दबाना है, वो उ़़चक कर साईड हो जायेगा, आपको उसके स्पेस में सें हवा की तरह क्रॉस कर जाना है.. फिर रिक्शा और त्रिशुल पकड़े बाबा से सामने होना है आप बाबा की ओर बढ़ते चलें आपकी स्पीड देखकर बाबा आपके करीब पहुँचते ही थोड़ा कंधो को सीधा करेगे …बस आपको उसी स्पेस मे से निकलना होगा… बिना ट़़च किये.

यहां गंगा को वॉटर बॉडी कहने वाली मशहूर फिल्म मेकर को विरोध इसलिये झेलना पड़ा क्योकि बनारसी गंगा को वॉटर बॉडी नही बल्कि मॉ मानते है, लेकिन मूर्ती विसर्जन करके उसी गंगा में जहर घोलने को लेकर पुलिस पीएसी की लाठी भी खाते है. गाऊ मॉ को उसके दूध बंद करते ही सड़कों पर छोड़ दिया जाता है, बाकी का जीवन गाय को यूँही भटकना पड़ता है|

बाकी तो आप समझदार हैं ही… यहाँ का पाखण्ड भी विश्व प्रसिद्ध हैं. बनारसी ठगों के बारे मे तो आपने सुना ही होगा, क्यो?

फिलहाल हमारी सड़कों पर अत्याचार जारी रहेगा, टैक्स हम देगे और वसूली पुलिस देव करेगे, सड़के हमारी कॉलोनी की डैमेज होगीं और मुनाफा सेंवई मंडी के व्यापारी कमायेगें, महादेव अब बूटी का सेवन कम करें, और हर हर महादेव के साथ-साथ अरहर महादेव पर ध्यान जरूर दें|

नवभारत टाईम्स में 9.11.2015 को प्रकाशित by shabab khan

…shabab khan
(Author is an Export Entrepreneur, Journalist, and Social Activist

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About Shabab Khan

A Journalist, Philanthropist; Author of 'The Magician', 'Go!', 'Brutal'. Being a passionate writer, I am into Journalism and writing columns, news stories, articles for top media house. Twitter: @khantastix khansworld@rediffmail.com
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