बसपा के मुख्तार अंसारी को जिताने के लिए भाजपा ने संघ को भी नाराज क्यों कर दिया?

UP ELECTION 2017

“इस चुनाव में पूर्वांचल की मऊ सीट पर भाजपा ने ऐसा खेल किया जो बड़े-बड़े सियासी पंडितों को भी समझ नहीं आ रहा हैं”

शबाब ख़ान

पूर्वांचल का माफिया कहे जाने वाले मुख्तार अंसारी जेल से ही चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन उनकी जीत भाजपा के एक फैसले से बिलकुल आसान हो गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की मऊ सीट पर भाजपा ने ऐसा खेल किया जो बड़े-बड़े सियासी पंडितों को भी समझ नहीं आ रहा। पूर्वांचल में भाजपा मुख्तार विरोधी सियासत करती है और मुख्तार भी भाजपा विरोध की ही राजनीति करते आए हैं। लेकिन इस बार मुख्तार अंसारी के खिलाफ भाजपा ने अपना उम्मीदवार ही नहीं उतारा।

सुनी-सुनाई है कि मुख्तार को जान-बूझकर मऊ की सीट से वॉकओवर दिया गया जिससे आरएसएस का नेतृत्व बेहद नाराज़ है। कहने वाले तो यहां तक कहते हैं कि पूर्वांचल में बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे मुख्तार अंसारी और भाजपा के कुछ नेताओं के बीच खिचड़ी पकी और इसके बाद ही भाजपा ने अपने उम्मीदवार को बैठ जाने का इशारा कर दिया। इस कानाफूसी के पीछे कुछ ठोस तर्क भी हैं।

अशोक सिंह को 14 फरवरी को प्रदेश कार्यालय से सिंबल मिला और वे इसे जमा कराने के लिए 15 फरवरी को मऊ में चुनाव अधिकारी के सामने पहुंचे। तारीख निकल जाने के बाद फॉर्म जमा नहीं हो सकता था  

मऊ सदर की सीट से मुख्तार अंसारी के खिलाफ पहले भाजपा ने अशोक सिंह को चुनाव में उतारने का फैसला किया था। अशोक सिंह के भाई अजय सिंह की आठ साल पहले हत्या कर दी गई थी। इस कत्ल में मुख्तार अंसारी नामजद अभियुक्त हैं। कहा जाता है कि अंसारी से मुकाबला करने के लिए ही अशोक सिंह ने पिछले साल भाजपा की सदस्यता ली थी। यानी वे पिछले एक साल से मुख्तार से दो-दो हाथ करने की तैयारी कर रहे थे।

अशोक सिंह ने मऊ सदर की सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भी भरा था। इसके बाद भाजपा का अधिकृत उम्मीदवार बनने के लिए उन्हें चुनाव आयोग के पास पार्टी का सिंबल जमा करवाना था। सिंबल का फॉर्म लेने के लिए अशोक सिंह लखनऊ गए भी। इस फॉर्म को जमा कराने की आखिरी तारीख 14 फरवरी थी। लेकिन अशोक सिंह को 14 फरवरी को ही प्रदेश कार्यालय से सिंबल मिला और वे मऊ में चुनाव अधिकारी के सामने इसे जमा कराने के लिए 15 फरवरी को पहुंचे। तारीख निकल जाने के बाद फॉर्म जमा नहीं हो सकता था इसलिए उनका आवेदन रद्द कर दिया गया।

इसके बावजूद अशोक सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ सकते थे। लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। उन्होंने मुख्तार अंसारी के खिलाफ चुनाव न लड़ने का फैसला किया और अपना नाम वापस ले लिया। अब भाजपा अपने गठबंधन के सहयोगी भारतीय समाज पार्टी के उम्मीदवार महेंद्र राजभर का समर्थन कर रही है। सुनी-सुनाई से कुछ ज्यादा है कि महेंद्र राजभर के बारे में भी रिपोर्ट कुछ खास अच्छी नहीं है। भाजपा के ही कुछ नेता बताते हैं कि महेंद्र कुछ साल पहले तक मुख्तार अंसारी के खासमखास होते थे। जब मुख्तार जेल में होते थे तो वे ही उनका चुनाव अभियान देखते थे।

संघ में कुछ लोगों का मानना है कि भाजपा ने मुख्तार अंसारी के खिलाफ अपना उम्मीदवार न उतारकर घाटे का सौदा किया है।

अब सवाल यह है कि जो व्यक्ति मुख्तार के बेहद करीब था, भाजपा ने उस पर दांव क्यों लगाया। पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुख्तार अंसारी के बसपा में शामिल होने के बाद माहौल थोड़ा बदला है। भाजपा को अब सबसे ज्यादा उम्मीद उत्तर प्रदेश के इसी पूर्वी हिस्से से है। सुनी-सुनाई ही है कि भाजपा को अनुमान है कि पूर्वांचल में मुख्तार अंसारी की वजह से मुसलमान बसपा का साथ दे सकते हैं। अगर अपने इलाके में मुख्तार मजबूत होते हैं तो हिंदू मतदाता भाजपा के पक्ष में गोलबंद हो सकते हैं। इस स्थिति में यहां पर सपा-कांग्रेस गठबंधन का गणित बिगड़ सकता है।

लेकिन मुख्तार की सीट पर भाजपा के उम्मीदवार का नदारद हो जाना आरएसएस को परेशान कर रहा है। बताया जाता है कि आरएसएस ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से इस बारे में सवाल-जवाब भी किये हैं। भाजपा ने इसे गठबंधन की जरूरत और मऊ में राजभर मतदाताओं की ज्यादा आबादी बताकर रफा-दफा करने की कोशिश की है। लेकिन संघ इस दलील को मानने को तैयार नहीं है।

संघ में कुछ लोगों का मानना है कि भाजपा ने मुख्तार अंसारी के खिलाफ अपना उम्मीदवार न उतारकर घाटे का सौदा किया है। अखिलेश यादव ने मुख्तार अंसारी और उनके परिवार को टिकट ना देने की जिद पर अपना सियासी करियर दांव पर लगा दिया था। भाजपा उन्हीं के खिलाफ अपने प्रत्याशी को सिंबल तक नहीं पहुंचा पाई। उत्तर प्रदेश में किसी के लिए भी इस बात को आसानी से पचा पाना संभव नहीं है।

Advertisements

About Shabab Khan

A Journalist, Philanthropist; Author of 'The Magician', 'Go!', 'Brutal'. Being a passionate writer, I am into Journalism and writing columns, news stories, articles for top media house. Twitter: @khantastix khansworld@rediffmail.com
This entry was posted in Nation and Politics, Political and tagged , , , , . Bookmark the permalink.