कुरआन के संदेश में बुद्धिमत्ता

ऐसा मालूम होता है कि बारिश के होने का समय एवं नवजात बच्चे का अपनी मां के पेट में लिंग क्या होगा उसके बारे में पहले से पता लगाया जा सकता है। क्या इन बातों को कुरआन में जिन पांच रहस्यों का वर्णन किया गया है उस सूची में शामिल करने की अब जरूरत नहीं है?
यह प्रश्न “समय” एवं “ज्ञान” के रहस्य से संबंध रखता है जो आयत में बताई गई पांच चीजों को संचालित करने का काम करता हैः

कयामत का इल्म केवल अल्लाह को है। यह वही है जो जमीन पर बारिश भेजता है और जो जानता है कि मां के पेट में क्या है। कोई नहीं जानता कि कल वह क्या कमाएगा और कोई नहीं जानता कि किस सरजमीन पर उसकी मौत होगी। अल्लाह को इल्म है इन सब बातों का, वही सब चीजों का जानने वाला है। (लुकमान 31:34)

आईए इन पांच चीजों पर क्रम से विचार करते हैं।

केवल अल्लाह जानता है कि कयामत कब कायम होगी। जैसा कि कुरआन बयान करता है कि यह वए वास्तविकता है और सिद्धांत है, इसलिए किसी मुसलमान के लिए यह उचित नहीं है कि उन चीजों के बारे में कोई विचार प्रस्तुत करे बिना यह कहे हुए कि (अल्लाह ही बेहतर जानने वाला है।” हम इस बात की सच्चाई की पुष्टि एक प्रसिद्ध हदीस के आधार पर भी करते हैं जिसमें यह बताया गया है कि एक बार फरिश्तों के सरदान हज़रत जिब्रील अ. तशरीफ लाए अल्लाह के नबी मुहम्मद स.अ.व. के पास और उनसे आग्रह किया कि वह कृपया कि ईमान, इस्लाम और एहसान का क्या मतलब है। हज़रत जिब्रील ने अल्लाह के नबी के बताने पर अपना सर हिलाकर यह कहते हुए पुष्टि की कि अपने सच फरमाया। हज़रत जिब्रील का अंतिम सवाल थाः “कयामत कब कायम होगी?” तो पैगम्बर ने जवाब दियाः “सवाल करने वाले से ज्यादा जिससे सवाल किया जा रहा है, नहीं जानता।” फिर उसके बाद उन्होंने कयामत आने के पहले घटित होने वाली कुछ निशानियों का जिक्र किया जो कयामत के आने से पहले प्रकट होंगी। अल्लाह के नबी का इस प्रकार का विनम्र व्यवहार था जब उनसे उन पांच चीजों के रहस्य के बारे में पूछा गया। पैगम्बर और जिब्रील दोनों को किसी हद तक उस चीज के बारे में ज्ञान था लेकिन उन्होंने यही जवाब देना मुनासिब समझा कि केवल अल्लाह को ही अंतिम तौर पर इसका इल्म है कि यह कब घटित होगी।

जहां तक इस प्रश्न की बात है कि कयामत किस प्रकार कायम होगी, यानि अपने सादृश्य रूप में, तो हम कई चीजों के बारे में अनुमान लगा सकते हैं और उनमें से कोई भी हो सकता है जो आपको संतुष्ट कर देः जैसे, एक धूमकेतू जमीन से टकराएगा या उसमें विस्फोट होगा या हो सकता है कि लोग कुछ हो और फिर उस पर उनका वश भी न रह जाए, इत्यादि लेकिन एक बार फिर वही बात आती है कि केवल अल्लाह को इल्म है कि यह कब होगा और कैसे होगा।

कुरआन की इस आयत में जिस दूसरे रहस्य का वर्णन किया गया है वह बारिश है जिस अल्लाह आसमान से जमीन पर बरसाता है। ये दो बिंदु हैं जिन्हें इस सवाल में उठाया गया है। लोग यह दवा कर सकते हैं कि कब बारिश होगी और ऐसा वह मौसम की विवेचना करके कर सकते हैं और फिर वह तर्क दे सकते हैं कि अब इस विषय पर बहस करने की जरूरत नहीं है कि बारिश का जमीन पर होना कोई रहस्यात्मक बात है। इसमें कोई शंका की बात नहीं है कि कुछ लोग ऐसी बातें करके दूसरों के मन में कुरआन की सत्यता एवं ईमान को लेकर भ्रम पैदा करना चाहते हैं। लेकिन मुसलमानों को चाहिए कि ऐसे प्रश्नों का सामना पूरी संवेदनशीलता से करें, भले ही ऐसे प्रश्न आपके सामने आएं जिसके पीछे ईश-निंदा की भावना छुपी हुई हो।

मैं इस प्रश्न से अपनी बात शुरू करता हूं कि कितने लोग हैं जो यह दावा कर सकते हैं कि वह अदृश्य अर्थात गैब को जानने वाले हैं भले ही आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक का संबंध वास्तव में अदृश्य चीजों के साथ है या जो उनकी हमारी समझ से परे है। वास्तव में, बारिश को लेकर जो उनका अनुमान होता है वह प्रत्यक्ष दुनिया में उन निशानियों और परिस्थितियों को देख कर होता है जो बारिश से पहले आमतौर पर देखने को मिलती है लेकिन उसका अदृश्य के ज्ञान से कोई लेना देना नहीं होता।

आईए इस बात को एक उदाहरण के जरिये आपको समझाते हैं। एक कमरे का वेंटेलेशन बंद कर दीजिए जबकि वह कमरा पूरी तरह लोगों से भरा हो और फिर कमरे में कुछ कार्बनडाइ ऑक्साइड डाल दीजिए, फिर कार्बनडाई ऑक्साइड और ऑक्सीजन के स्तर को मापिए। फिर इस बात की भविष्यवाणी कीजिए कि कितने मिनटों बाद कमरे में मौजूद लोगों को किसी प्रकार का सर दर्द महसूस होगा। अगर हमारी भविष्यवाणी सच साबित होती है तो फिर क्या होगा? क्या हम यह कहेंगे कि हमें गैब का इल्म है? नहीं। गैब के बारे में कुरआन स्पष्ट करता है कि ये वह बातें जिसका इल्म केवल अल्लाह को है। सारी तफसील जानते हुए कि बारिश कितनी और कब होगी यह भी जोड़ दीजिए कि आने वाले पांच और दस सालों में इसका स्वरूप क्या होगा तो क्या उसका यह अर्थ लगा लिया जाए कि आप गैब का जानने वाला बन गए हैं। क्या लोग इस बात की भविष्यवाणी कर सकते हैं कि आने वाले पांच और दस सालों में बारिश कितनी होगी? उसके साथ ही हमने अक्सर देखा है कि मौसम विभाग जो भी भविष्यवाणी करता है कई बा रवह सच साबित नहीं होती; कई बार तो ठीक उसके उल्टा होता है। यह इस बात को बताता है कि उन्हें इन बातों के बारे में अंतिम तौर पर कोई ज्ञान नहीं होता बल्कि परिकलित गणना के आधार पर ऐसी भविष्यवाणी करते हैं।

उसके अलावा बारिश होगी या नहीं इसको जानने के लिए बहुत सारे उपकरणों एवं चीजों की जरूरत नहीं है। बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो केवल अपने वर्षों के अनुभव के आधार पर यह बता सकते हैं कि बारिश कब और कितनी होगी और उनकी भविष्यवाणी किसी मौसम विज्ञानी से कम भी नहीं होगी। आईए, एक घटना का वर्णन करता हूं जिसका संबंध इस विषय से है।

कुछ अमेरिकी वैज्ञानिक एक गांव में कुछ शोध कार्य करने के लिए आए। उन लोगों ने देखा कि कुछ चरवाहे बड़ी तेजी के साथ बकरे बकरियों को चरागाह की ओर हांकने के बजाए, बाड़े की ओर हांक रहे हैं। वैज्ञानिकों को यह देखकर बेहद आश्चर्य हुआ और उन्होंने पूछा कि ऐसा वह क्यों कर रहे हैं। उन चरवाहों ने बताया कि बारिश होने वाली है इसलिए वह ऐसा कर रहे हैं। उन वैज्ञानिकों ने अपने उपकरणों की मदद से मौसम की जांच की और पाया कि बारिश के तो कोई आसार ही नहीं है। लेकिन कुछ ही देर में बारिश शुरू हो गई। वैज्ञानिक भी अपने को छुपाने के लिए बाड़े के अंदर आ गए और चरवाहे से पूछा कि आपको यह कैसे मालूम हो गया था कि बारिश होने वाली है। उसने बतायाः “मैंने वर्षों के अवलोकन के बाद यह पाया कि बकरियां अपनी दुमों को अपने पैरों के बीच नीचे की ओर कर लेती हैं तो फिर बारिश आती है।”यह सुनकर उन वैज्ञानिकों को अपने उन आधुनिक उपकरणों को देख कर दया आई कि यह किसी काम के नही हैं। और यह बकरियों की दुम से ज्यादा महत्व नहीं रखते। उसी प्रकार बदीउज्जमां नुर्सी यह कहा करते थे कि वह अपने गठिया के रोग के बल पर अड़तालिस घंटे पहले जान जाते थे कि बारिश कब होने वाली है। कुछ गांववासी तो वातावरण में हो रहे बदलावों को देख कर बता दिया करते थे कि कब बारिश होगी और कब बर्फ पड़ेगी।

हाइग्रोमेट्री, हाईड्रोस्टैटिक्स, डाइनैमिक्स और मौसम विज्ञान एवं दूसरे विज्ञानों की रौशनी में, वातावरण में हो रहे बदलावों का अवलोकन करके, जैसे बादल, उनका घनत्व, नमी, हवा के दबाव में परिवर्तन, बहाव, हवा की स्थिति, तापमान संबंधी प्रणाली इत्यादि का सहारा लेकर, जिसमें अति आधुनिक उपकरणों की भी मदद ली जाती हैः जैसे रेडार, कंप्यूटर, सेटेलाइट, इत्यादि और उसके आधार पर मौसम की भविष्यवाणी की जाती है। लोग केवल संकेत लक्षण के आधार पर बताते हैं कि बारिश होगी या नहीं। कुछ लोग अपने इन अनुमानों पर आधारित ज्ञान को अदृश्य के ज्ञान के समक्ष ठहराते हैं, यानि वह बता सकते हैं कि कितनी मात्रा में बारिश होगी और किस समय होगी। ऐसा करके वह यह जताने की कोशिश करते हैं कि कुरआन की इस आयत को असत्य ठहरा दिया जाए। लेकिन उनका ऐसा करना या मानना केवल उनकी अज्ञानता एवं धृष्टता को ही जाहिर करता है।

मैं पैगम्बर मुहम्मद स.अ.व. की एक अद्भुत हदीस का वर्णन करूंगा जिसे आज वैज्ञानिक रूप से स्वीकार भी कर लिया गया है। उन्होंने फरमायाः “कोई भी साल पिछले साल के मुकाबले अधिक बारिश वाला साल नहीं होता।”2 इस हदीस से यह बात साबित होती है कि हर साल जमीन एक समान मात्रा में बारिश होती है। लेकिन हम इस बात से अनजान होते हैं कि वह बारिश कितनी मात्रा में, कब और कहां होगी। यह गैब की बातें हैं और उसे जाना नहीं जा सकता।

इस आयत में जिस तीसरी बात का वर्णन किया गया है वह दूसरा बिंदू है जिसे हम प्रश्न में उठाया गया है। यह अल्लाह है जिसे इस बात का इल्म है कि मां के पेट में क्या है। लेकिन कुछ लोग कह सकते हैं कि डाक्टरों को पता होता है कि मां के पेट में क्या है, लड़का या लड़की, अल्ट्रासाउंड या दूसरी मेडिकल प्रक्रियाओं के द्वारा। यह बेहतर होता अगर वह इस बात पर ध्यान देते कि दृश्यमान दुनिया में जो कुछ भी वह जानते हैं जिसकी निशानी और लक्षण उन पर जाहिर होने लगते हैं, उसका फिर भी गैब के इल्म से कुछ लेना देना नहीं होता।

लोग यह भी दावा करते हैं कि वह किसी अजन्मे बच्चे के लिंग के बारे में अनुमान लगा सकते हैं क्योंकि वे लिंग गुणसूत्र का पता लगा सकते हैं निषेचित होने वाले अंडाणु के अंदर कि वह एक्स एक्स या वाई वाई है। एक बार फिर, वीर्य में लिंग गुणसूत्र के बारे में बताने की योग्यता होने के बावजूद, चाहे उसका पता मां के पेट में लग जाए या बाहर, उसका गैब के इल्म से कुछ लेना देना नहीं है। एक रौशनी प्रदान करने वाली हदीस में अल्लाह के रसूल फरमाते हैं: “अगर पुरूष का वर्चस्व होता है तो लड़का पैदा होता है या/और अगर महिला का वर्चस्व होता है तो लड़की पैदा होती है।” (इस हदीस का महिला और पुरूष के संबंध में वर्चस्व से कुछ लेना देना नहीं है, जैसा कि अतीत में कुछ व्याख्याताओं ने इसका गलत अर्थ निकालने की कोशिश की है।) सच्चाई यह है कि अगर वीर्य जिसमें पुरूष के गुणसूत्र (एक्स वाई) पहले पहुंचते हैं, तो वह अंडाणु की झिल्ली को भेदने में सफल होते हैं और उसे निषेचित करते हैं, तो लड़का पैदा होता है, लेकिन अगर महिला गुणसूत्र पहले पहुंचता है और अपना वही काम करत है जैसा कि ऊपर बताया गया है तो फिर लड़की पैदा होती है। भविष्य की घटनाओं को लेकर कुछ ज्ञान और निर्धारक कारकों की जानकारी होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह भविष्य के बारे में पहले से जानते हैं; ऐसा दावा करना कोरा भ्रम ही कहा जा सकता है।

कुरआन कहता है कि यह अल्लाह ही है “जिसे ज्ञान है कि मां के मेट में क्या है” यह यहां शब्द मां का प्रयोग करता है। यह आयत यह नहीं कहती कि यह अल्लाह है जो जानता है कि मां के पेट में लड़का है या लड़की। “क्या” केवल अजन्मे बच्चे के लिंग की बात करती है बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि वह बच्चा पैदा होगा या नहीं और अगर ऐसा होगा तो फिर वह कितने दिनों तक मां के पेट में रहेगा या रहेगी, वह जिंदा पैदा होगा और उसकी प्राकृतिक रूप से वृत्ति एवं आचरण क्या होगा, वह नेक होगा वह नेक होगा या बुरा, वह एक व्यक्ति के रूप में क्या पहचान हासिल करेगा, एक अच्छा ईमान वाला होगा या शैतान के नक्शे कदम पर चलने वाला होगा, जीवन में क्या-क्या काम करेगा, अपने मां-बाप और समाज के लिए एक अनुग्रह साबित होगा या शाप और इस दुनिया और कयामत के दिन उसके वजूद को किस प्रकार से लेंगे। इसलिए वास्तव में जो गैब की बातें हैं उसे मां शब्द के माध्यम से समग्र रूप से समेटने की कोशिश की गई है। यहां मामला केवल लिंग के निर्धारण का नहीं है, कुरआन जिस बात की ओर इशारा करता है वह एक समग्र, व्यापक और वैश्विक ज्ञान की ओर करता है। केवल इस स्तर के ज्ञान को ही उचित रूप से गैब का जानने वाला ज्ञान कहा जा सकता है। यह दावा करना कि इंसान हर चीज को जान सकता है और कर सकता है यह कोरा भरम और नादानी के अलावा और कुछ नहीं है।

इस बिंदु को और स्पष्ट करने के लिए सरल उदाहरण पर विचार कीजिएः

किसी बागीचे की बाड़ के एक ओर खड़े होकर आप किसी सेब के पेड़ को देखते हैं। उसकी जड़ और उसका तना आपकी ओर है, लेकिन उसकी पत्तियां एवं शाखाएं दूसरी ओर झुकी हुई हैं, इसलिए आप उसे देखने में असमर्थ हैं। जब इसमें फल देने का समय आता है, तो आप कहते हैं कि दूसरी ओर की जो शाखाएं हैं वह अब फलों से लदी हुई हैं। लोग जब उसे देखते हैं तो वे भी वास्तव में वही पाते हैं। लेकिन क्या इसका यह अर्थ लगा लिया जाए कि आपको गैब का इल्म है? या फिर आप एक साधारण घटना के बारे में बता रहे हैं जिसे आमतौर पर हर कोई जान सकता है? निश्चित रूप से दूसरी बात अधिक तर्कसंगत है। ठीक यही बात उस बच्चे पर भी लागू होती है जो अभी अपनी मां के पेट में है। इसको जानना कोई गैब की जान लेना नहीं है, बल्कि केवल उस पेड़ के बारे में बताना है जिसकी जड़ें दृश्यमान दुनिया में हैं और जिसकी शाखाएं अदृश्य दुनिया की ओर झुकी हुई हैं। इस प्रकार के तुच्छ एवं गलत दावे के आधार पर आपको गैब का इल्म है। कुरआन की आयत को झुठलाना आपकी पूर्णतौर पर नादानी एवं बेवकूफी को ही दर्शाता है।

इस आयत में जो चौथा बिन्दु उठाया गया है वह यह कि “किसी को नहीं मालूम कि कल वह क्या कमाएगा।”यहां जिस कमाने की बात की गई है उसका तात्यपर्य केवल धन के रूप में आजीविका कमाना नहीं है, बल्कि आमतौर पर अपने अच्छे बुरे कर्मों का लाभ भी अर्जित करना है कि वह उससे क्या हासिल करेगा यानि गुनाह या सवाब। कोई नहीं जानता कि वह उसके साथ क्या पेश आने वाला है। इस कमाई के अधीन वह सारी चीजें आ जाती हैं जो इंसान प्रबोध एवं शांति के तौर पर कमाता है। अगर वैज्ञानिक इस ज्ञान और अनुभव में वृद्धि करते हैं तो इसे भी कमाई की श्रेणी में रखा जाएगा और केवल अल्लाह को इल्म है कि वह इसमें कितना इज़ाफा करेगा और कब करेगा। कभी-कभी आप कई खंडों में किसी पुस्तक को पढ़ लेते हैं लेकिन आपको उससे कुछ हासिल नहीं होता; और दूसरी ओर एक पंक्ति पढ़ कर भी आप इतना ज्ञान अर्जित कर सकते हैं कि उससे एक पूरी किताब पढ़ कर भी हासिल नहीं कर पाएंगे और उससे आपकी प्रेरणा में वृद्धि होता है।

लेकिन अगर इस संदर्भ को केवल आर्थिक अर्थ में लेते हैं, तो भी यह संभव नहीं है कि कितने सारे लोग निर्धारित राशि के हिसाब से कल को अपना पगार हासिल करेंगे क्योंकि कोई अप्रत्याशित उपहार, कोई अप्रत्याशित खर्च, कोई दुघर्टना या प्राकृतिक आपदा, हो सकता है कि आने वाले दिन आपकी कमाई के सारे खेल को बिगाड़ दे। मुझे नहीं लगता कि इस तर्क को और व्याख्यायित करने के लिए अधिक उदाहरणों की आवश्यकता है। आप कहिए जैसा कि कुरआन कहता है, “कोई नहीं जानता कि कल वह क्या कमाएगा।”

पांचवा बिंदु है “कोई नहीं जानता कि वह किस सरजमीन पर मरेगा।” केवल अल्लाह को मालूम है कि वहां मरेगा और कैसे उसकी मौत होगी। इज्राईल, जो मौत के फरिश्तों के सरदार हैं या उनके सहयोगी यह ऐलान करेंगे, “जिसका इल्म हमें नहीं है। कोई इस पर अपनी आपत्ति दर्ज नहीं करता, इसलिए मैं इसे वहीं छोड़ता हूं।

जिन पांच रहस्यों की इस आयत में बात की गई है उनको अल्लाह अपने इल्म एवं कानून के मुताबिक ही अमल में लाता है। हम अपने साधारण जीवन में कुछ चीजों के बारे में जानते हैं लेकिन आप इसकी तुलना अल्लाह के इल्म से नहीं कर सकते। हमारा ज्ञान केवल चीजों की जानकारी प्राप्त करने के लिए ही है जो हमें गैब से अता किया गया है और जो इस दुनिया में जाहिर होता है। हम बिल्कुल निश्चिततौर पर किसी प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकते कि यह कब होगा, और कहां घटित होगा। यह खासतौर पर बारिश के मामले में भी। यह रहस्य हमेशा बना रहेगा और इसका अंतिम इल्म केवल अल्लाह ही के पास है।

निश्चित रूप से यह केवल अल्लाह ही है जो हर चीज को जानने वाला और उससे पूर्ण वाक़फियत रखने वाला है।

(Fatehullah Gullen is the author of this article)

Advertisements

About Shabab Khan

A Journalist, Philanthropist; Author of 'The Magician', 'Go!', 'Brutal'. Being a passionate writer, I am into Journalism and writing columns, news stories, articles for top media house. Twitter: @khantastix khansworld@rediffmail.com
This entry was posted in Faith, Islam, Religion and God and tagged , , , . Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s