गहरी साजिश: जा रही है एक महिला पत्रकार की धीरे-धीरे जान, पुलिस की कार्य प्रणाली संदेह के घेरे में

  • ससुर द्वारा लिखी गई प्रापर्टी बनी जी का जंजाल

  • विभिन्न माध्यमों से दिया जा रहा है धीमा जहर

  • कभी नौकर, कभी पड़ोस का दुकानदार भेजता है विषाक्त खाद्य पदार्थ

  • पुलिस महज वहम मानकर देती है खोखली संतावनां

  • ऑल इंडिया रिपोर्टअर्स एसोसिएशन (आईरा) खड़ा हुआ पत्रकार के साथ, पुलिस प्रोटेक्शन की होगी मॉग


अमेठी: गुण्डाराज मुक्त समाज का ढोल पीटकर कर बहुमत में आयी भाजपा की उत्तरप्रदेश मे योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बन चुकी है। आम जनता को लगता है कि उत्तरप्रदेश से अब गुण्डाराज का सफाया पक्का है लेकिन प्रदेश से जुर्म का नामोनिशान मिटा देने की भाजपा की कसमें चुनावी जुमला मात्र प्रतीत होने लगा है।


आम जनता को छोड़िए, यहां एक महिला पत्रकार पुलिस प्रशासन के एक छोर से दूसरे छोर तक अपनी व अपने बेटे की जान की सलामती के लिए चक्कर काट रही है लेकिन महकमा अपने पुराने ढर्रे पर चलता हुआ मामले को टालनें मे लगा है। शायद महकमें को अंदाजा नही कि जिसके साथ वह टाल-मटोल कर रहा है वह महिला एक सम्मानित पत्रकार है, यदि महिला के साथ कोई भी अनहोनी होती है तो पुलिस प्रशासन मीडिया को जवाब नही दे पायेगा।


पुलिस प्रशासन से निराश पत्रकार ने जब भारत पर में फैले अठ्ठारह हजार पत्रकारों के मंच ऑल इंडिया रिपोर्टअर्स एसोसिएशन (आईरा) से संपर्क किया और अपनी आपबीती सुनाई तो पदधिकारियों को जैसे सॉप सूध गया, एसोसिएशन नें एकमत से फैसला लिया कि अमेठी पत्रकार मिनाक्षी मिश्रा को हर कीमत पर इंसाफ दिलाया जाएगा। इस संदर्भ में उत्तरप्रदेश पुलिस महानिरीक्षक जावीद अहमद से मिलकर टाल-मटोल करने वाले अमेठी पुलिस अधिकारियो के विरूद्ध कार्यवाई के लिए ज्ञापन सौपनें का फैसला लिया गया। इसी क्रम में आईरा का एक पॉच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जल्दी ही अमेठी का दौर करेगा।


क्या है पत्रकार मिनाक्षी मिश्रा का मामला:


अमेठी जिले के बारामासी क्षेत्र में अपने इकलौते पुत्र अक्षज के साथ अपने ससुराल के मकान में अकेले रहने वाली मिनाक्षी मिश्रा का विवाह अमित मिश्रा से वर्ष 2004 में हिंदु रीति रिवाज से संपन्न हुआ था। विवाह के बाद मिनाक्षी अपने पति के पैतृिक आवास मोगा, पंजाब में जाकर रहने लगी। नवविवाहित मिनाक्षी के हाथ से अभी मेहंदी भी नही झूटी थी कि उनको दहेज के लिए सास-नंनदों ने तरह-तरह से शारीरिक व मानसिक रूप से प्रतांडित करना शुरू कर दिया। कभी किसी बहाने तो कभी किसी उन्हे दहेज की उलाहना  मिलती रही, और इस क्रम में पत्रकार के पति अमित मिश्रा भी धीरे-धीरे अपनी मॉ-बहनों का साथ देने लगे और पत्रकार पर ससुराल वालो का अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा।


लेकिन इंसानियत को शर्मसार करने वाले परिवार के मुखिया यानि मिनाक्षी के ससुर को यह जब नागवार लगने लगा तो उन्होने मिनाक्षी के पक्ष में उसके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया, उन्होने मोगा स्थित एक प्लांट का बैनामा अपनी बहु के नाम परिवार के लाख विरोध के बावजूद कर दिया, और यहीं से मिनाक्षी अमित मिश्रा और उसकी बहनों के लिए सबसे बड़ी दुश्मन बन गई, और फिर शुरू हुआ एक सीधी-साधी महिला की जान लेने का खेल, जो अब तक लगातार जारी है।


ससुर द्वारा मिनाक्षी को दी गई तकरीबन 50 लाख की प्रापर्टी तो ससुराल वालों को काट ही रही थी, यह सोचकर वह और हलकान है कि ससुराल की पैतृिक संपत्ति जोकि आज की तारीख में लगभग 60 साठ करोड़ की है उसका इकलौता वारिस मिनाक्षी का बेटा है। पहले सिर्फ सास और नंनदें कहती थी कि वह अमित का उ़ससे तलाक करवा कर उसकी दूसरी शादी कराएगीं, अब स्यंव अमित कहते हैं कि उनके पीछे कोई लड़की पड़ी है जिससे उन्हे शादी करनी पड़ेगी वरना तथाकथित लड़की उन्हे कहीं का नही छोडेगी। क्यो? क्या किया है अमित मिश्रा नें उस तथाकथित लड़की के साथ कि वह अपनी कानूनन वैध पत्नी मिनाक्षी मिश्रा से यह जिक्र कर रहें हैं? यहॉ से मिनाक्षी के पति के चरित्र पर उंगली उठना लाज़मी हैं। मुझे तलाक दे दो यह अमित की मिनाक्षी से बार-बार की जाने वाली मॉग है? क्या कमी है उस पढ़ी लिखी महिला में जोकि एक दक्ष ग्रहिणी भी है? जिसके साथ उसनें अपनी मर्जी से सात फेरे लिए थे जिसमें दोनो परिवारों की रज़ामंदी शामिल थी। हलांकि, मिनाक्षी ने अपने पति को किसी भी कीमत पर तलाक देने से मनाकर दिया है, क्योकि मिनाक्षी जानती है कि वजह उसके नाम ससुर द्वारा की गई संपत्ति है। इससे खिजलाए पति, सास और नंनद तब से मिनाक्षी की जान लेने की कोशिश में लगे हैं।


अब सीधे गोली मार नही सकते, पूरा ससुराल जेल चला जाएगा यह सोच कर फिल्मी स्टाईल में मिनाक्षी और उसके पुत्र का सफाया करने की गहरी साजिश रचि गई, साजिश ऐसी की सॉप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। आरोप है कि प्लान यह बना कि पत्रकार को सीधे न मारकर स्लो पॉयज़न देकर धीरे-धीरे मारा जाए। इस प्लान में मुख्य भुमिका मिनाक्षी की नंनद डा० उर्मिला शुक्ला की है, आखिर एक डाक्टर ही तो बता सकता है उन उपलब्ध केमिकलस के बारे में जो इंसान के नर्वस सिस्टम पर आहिस्ता-आहिस्ता असर करता है। और, असर हो रहा है। कभी नाक से खून निकलना, हफ्तों तक सिरदर्द रहना, शरीर में ऐठन होना, और पूरे शरीर पर काले निशान अचानक उभर आना क्या है? और यह सब होता कब है? खाना खाने के बाद। मतलब साफ है, खानें मे कुछ था।


बता दें कि पंजाब के मोगा स्थित ससुराल में जब मिनाक्षी का रहना मुश्किल हो गया तो वह अपने बेटे को लेकर अमेठी चली आई जहां बारामासी क्षेत्र में उसके ससुर का एक भवन है जिसमें आजकल वह रहती है। यहॉ आकर मिनाक्षी नें ससुराल वालों पर डीवी एक्ट के तहत मुकदमा कर दिया और अतत: कोर्ट नें फैसला मिनाक्षी मिश्रा के पक्ष में देते हुए पति अमित मिश्रा को आदेश दिया कि वह अपनी पत्नी मिनाक्षी मिश्रा और उसके पुत्र को एक लाख रूपए का मासिक गुजारा-भत्ता दे। कोर्ट के इस फैसले के बाद जो पति मिनाक्षी से दूर भागता था वह स्वंय माफी मॉगकर मिनाक्षी के साथ अमेठी में रहने लगा। लेकिन इसमें कितनी गहरी चाल है यह मिनाक्षी को धीरे-धीरे मालूम चलना शुरू हो गया।


अपने व अपने मासूम बेटे की गिरते स्वास्थ्य से मिनाक्षी परेशान थी तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने सुशिक्षित पत्रकार को जड़ से हिला दिया। मिनाक्षी ने घरेलू कामधाम के लिए एक लड़के को घर पर रखा था, एक दिन जब मिनाक्षी की मॉ उससे मिलने घर आयीं तो उसी लड़के सें उन्होने बाजार से समोसे मंगाये। मॉ-बेटी ने अभी समोसे खाये ही थे कि उन दोनो की हालत बिगड़ने लगी। शक होने पर जब उस लड़के की तलाशी ली तो उसके जेब से सुर्ती के पैकेट में छिपायी गई पुड़िया में पाउडर मिला, पूछे जाने पर लड़के नें बताया कि वो पाउडर किसी व्यक्ति नें दिया थी और कहा था कि यह पाऊडर पत्रकार के खाने पीने की चीजो में थोड़ा-थोड़ा मिला दिया करे जिसके बदलें उसनें नौकर को अच्छी-खासी रकम भी दिया था। 


मामला थानें पहुँचा लेकिन आरोप है कि मामले को पुलिस ने किसी नेता के दबाव में आकर दबा दिया। यहॉ तक की बरामद जहर की पुड़िया भी पुलिस नें गायब कर दिया। नियमत: पुलिस को मिनाक्षी का मेडिकल परिक्षण कराना चाहिए था लेकिन पुलिस ने इसकी शायद जरूरत ही नही समझी, क्योकि कार्यवाई न करने का दबाव था। हालत बिगड़ने पर मिनाक्षी को लखनऊ ले जाकर ईलाज कराया गया, वहॉ उसके ब्लड़ को सैंपल के रूप मे लेकर जॉच के लिए भेजा गया, चूंकि यह एक प्राईवेट अस्पताल नें करवाया था जिन्हे खरीदना और भी आसान होता है, सो एक साल बाद भी मिनाक्षी के हाथ जहरखुरानी से संम्बधित ब्लड रिपोर्ट नही लगी। इधर पुलिस नें हिरासत में लिए गये नौकर को भी छोड़ दिया, उससे यह तक नही पूछा कि जहर की पुड़िया उसे किसमे दी थी।यदि पूछा था, तो वो खुलासा भी नोटो के बंडल के नीचे कहीं दब गया। मॉ-बेटी नें बहुत दौड़-भाग किया लेकिन पैसा बोलता है, और चीख-चीखकर बोलता रहा, पैसों की इस चीत्कार में एक महिला की आवाज कहॉ दब गई किसी नेे ध्यान नही दिया।


एक अकेली महिला दर-दर भटक रही है, कभी एसपी साहब के दरबार मे हाजिरी लगाती है, कभी सीओ को अर्जी देती है, कभी कोतवाली इंस्पेक्टर साहब को समझाने की कोशिश करती है कि कैसे पैसों की लालच में फंसें आसपास के दुकानदार भी अमित मिश्रा के कॉन्ट्रैक्ट किलर का रोल निभा रहे हैं। मिनाक्षी जिस इलाके में रहती है वहॉ गिनती के स्टोर्स है। आश्चर्य होता है यह जानकर और समझने पर कि महिला दुकान से जब कोई खाद्य सामाग्री की खरीदारी करती है तो दुकानदार उसे अलग से रखे गये सामान को उसे पकड़ाता है। यहॉ तक कि पैकेट बंद सामानों के इस्तमाल के बाद भी मॉ-बेटे की हालत बिगड़ी है। क्या आपनें कभी ऐसे शैम्पु का प्रयोग किया है जिसके इस्तमाल के बाद आपके शरीर पर, चेहरे पर छाले निकल आये हो? नही किया होगा। लेकिन अमेठी की यह मिनाक्षी नाम की महिला हर ऐसी चीज का प्रयोग कर चुकी है जिससे उसे नुकसान हुआ है। अब वह खाने-पीने का सामान 40 किमी दूर से लाती है। लेकिन जान लेने पर उतारू पति यहां भी चाल चलता है।


मिनाक्षी बताती हैं कि दो बार उसके दोपहिया वाहन को पीछे से टक्कर मारी गई। वह सड़क पर गिरी, लेकिन इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती टक्कर मारने वाला गायब हो चुका था। किस्मत या भगवान साथ था सो बच गई लेकिन एक पढ़ी लिखी महिला क्या राम भरोसे ही बैठी रहेगी? सो वो पुलिसवालो के दरवाजे खटखटा रही है। यह दस्तक प्रशासन अनसुनी कर रहा है लेकिन चौथा स्तम्भ यदि दस्तक देगा तो नजारा दूसरा ही होगा।


हमनें उठाये पुलिस के सामने सवाल


जब हमने खुद अमेठी कोतवाली से संपर्क कर महिला पत्रकार की एफआईआर दर्ज करने की बात कही तो कोतवाली इंस्पेक्टर हमें ज्ञान देने में लग गये कि ‘सीलबंद खाद्य सामाग्री में मिलावट कैसे संभव है?’ तो जनाब बता दें कि  पुलिस और पत्रकार दोनो जानते है कि ट्रेनों में जहरखुरानी करने वाले गिरोह केले और दूध के बंद पैकेट में जहर मिलाकर यात्री को कैसे लूट चुकें है। सेब के बीज को सुखाकर उसका पाऊडर बनाया जाता है, उसमे धतूरे का बीज मिला कर पानी में मिक्स करिए, एक महीन वाली सिरींज में भरिए और केले में इंजेक्शन लगा दीजिए, दूध के पॉली पैक में भी इंजेक्शन के माध्यम से जहर मिलाया जा सकता है। जहॉ, छेद हुआ है वहॉ बस एक बूंद मोमबत्ती से गर्म मोम टपका दें, लीजिए सील पैक मगर जहरीला दूध हाजिर है। इस तरह के बहुत से केमिकल फार्मूला है जिसे यदि इंसानी शरीर में थोड़ा-थोड़ा पहुँचाया जाये तो इंसान का नर्वस सिस्टम हमेशा के लिए डाउन हो जाता है। जरा सोचिये, दस वर्षीय अक्षज के स्वास्थ्य पर क्या असर हो रहा होगा। एक अकेली मॉ कैसे लड़ रही होगी कुछ कलयुगी रावणों के गुट से जो हत्या करना तो चाहते है लेकिन ऐसे नही कि फंस जाए। क्या आहिस्ता-आहिस्ता रोज तिल-तिल कर मर रही महिला और उसके दस वर्षीय पुत्र के प्रति पुलिस प्रशासन इतना संवेदनहीन है कि बस वो एक ही रट लगाये है कि यह सब महिला का वहम है?


यदि वहम हैं तो नौकर के पास से पकड़ा गया पाउडर प्रशासन नें कहॉ गायब कर दिया? जिस नौकर पर 504, 307, 120B के तहत कार्यवाई होनी चाहिए थी उसे छोड़ क्यो दिया? महिला का मेडिकल मुआयना क्यो नही हुआ? ऐसे बहुत से सवाल है जो प्रशासन को किसी अनहोनी की अवस्था में देना मुश्किल हो जाएगा।


पुलिस प्रशासन के उपर से नीचे तक लगभग हर दफ्तर में मिनाक्षी की लिखित शिकायत ठंडे बस्ते में पड़ी है। अपनी तहरीर में मिनाक्षी नें अपने पति अमित मिश्रा, नंनद डा० उर्मिला, पूनम को नामजद किया है, क्या नियम नही है कि पहले पुलिस एफआईआर दर्ज करे, फिर नामजद लोगो को बुलाकर पूछताछ करे, और ‘वहम है’ की बांसुरी बजाना छोड़कर पूरे मामले की गहनता से जॉच किया जायेे, जिसमें फोरेंसिक टीम की भी मदद ली जाए?


जिन दुकानदारों पर महिला आरोप लगा रही है, क्या पुलिस नें उनसे पूछताछ किया? क्या पुलिस को मिनाक्षी के पति से यह नही पूछना चाहिए कि वह क्यो अपनी पत्नी पर उसके ससुर द्वारा दी गई संपत्ति को खुद के नाम कराने का दबाव बना रहे हैं? और सबसे बड़ी बात क्या नौकर को हिरासत में लेकर पुलिस को पूछताछ नही करना चाहिए? ऐसे बहुत से सवालिया निशान है जिन पर यदि पुलिस पूरी ईमानदारी से काम करे तो महिला के इर्द-गिर्द बुने जा रहे इस षडयंत्र का राज फाश होनें में देर नही लगेगी। या फिर पैसों की चीत्कार के आगे पत्रकार जोगिंदर के बाद महिला पत्रकार मिनाक्षी मिश्रा भी काल के गाल में समा जाएगी? यह आने वाला वक्त बताएगा।


(Minakhshi Mishra is one of my close associates in Journalism, she has a 10 years old kid she named Akshas. She resides in Amethi district in Uttar Pradesh. A very honest, soft spoken, logical and so intelligent woman who is taking her own stride to grow her only child. A brave heart who inspite of all those conspirators is making her own way, and if not physically she is beating her enemies psychologically)

Advertisements

About Shabab Khan

A Journalist, Philanthropist; Author of 'The Magician', 'Go!', 'Brutal'. Being a passionate writer, I am into Journalism and writing columns, news stories, articles for top media house. Twitter: @khantastix khansworld@rediffmail.com
This entry was posted in Crime, Journalist, Media, News, Social Cause and tagged , , , , , , , , , . Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s