बिगड़ी महिला पत्रकार मिनाक्षी मिश्रा की हालत, जहर के प्रभाव में बेसुध हो पहुँची अस्पताल

महिला पत्रकार मीनाक्षी मिश्रा का मामला।

  • अब तक नही कराया पुलिस नें महिला का मेडिकल मुआयना

  • आसपड़ोस से पूछताछ कर जांच निपटा देने का आरोप

  • आरोपित दुकानदारों से स्वयं लिया पुलिस ने जांच के लिये सैम्पल

“महिला पत्रकार के साथ जारी है जहरखुरानी, 2 अप्रैल को सुबह 3 बजे बिगड़ी हालत, पहुँची अस्पताल…”

-शबाब ख़ान


अमेठी: महिला पत्रकार मिनाक्षी मिश्रा के गंभीर केस को 26 मार्च को मीडिया द्वारा उठाने के बाद लखनऊ स्थित पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय से अमेठी पुलिस को जांचकर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश प्राप्त हुआ। आनन फानन में अमेठी एसपी ने ट्रेनी सीओ बीनू सिंह के हाँथ में मामले की विवेचना सौंप दी। विवेचना अधिकारी के रूप में एक महिला पुलिस अधिकारी को देख कर महिला पत्रकार मीनाक्षी मिश्रा के साथ साथ मामले पर पैनी नजर रख रहे देश भर के पत्रकारों और पत्रकार संघों को इंसाफ मिलने की आस बंध गयी थी। लेकिन 31 मार्च, शुक्रवार को अमेठी से जो जानकारी प्राप्त हुई उसने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब यह प्रतीत होने लगा है कि इंसाफ की यह लड़ाई दूर तक जाने वाली है।

विदित हो कि उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने पुलिस महकमें को साफ़ निर्देश दिया था कि किसी मीडिया कर्मी का उत्पीड़न हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नही जायेगा। लेकिन लगता है कि मुख्यमंत्री के इस संदेश का अमेठी पुलिस पर कोई असर नही है।

ज्ञात हो कि महिला पत्रकार मीनाक्षी मिश्रा ने अपने पति अमित मिश्रा, ननद डॉ उर्मिला शुक्ला व पूनम तिवारी पर आरोप लगाया था कि यह तीनों पूर्व में उसके ससुराल पंजाब के मोगा कस्बे में उसे धीमा जहर देकर जान से मारने की कोशिश करते रहे थे। जहाँ से जान बचाकर अमेठी मे ससुराल के घर में अपने इकलौते पुत्र अक्षज मिश्रा के साथ आकर रहने लगी। यहॉ किसी तरह जीवन यापन कर रही मीनाक्षी मिश्रा को अब दुकानदारों के जरिये धीमा जहर दिला कर स्वाभाविक मौत देने की कोशिश की जा रही। जिसकी शिकायत महिला पत्रकार नें सभी सक्षम अधिकारियों से किया है।

डीजीपी कार्यालय से जांच का आदेश आने के बाद विवेचना अधिकारी बीनू सिंह मिनाक्षी मिश्रा के घर पहुँची और मिनाक्षी को पहले तो फटकार लगाई कि उसनें मामला मीडिया में क्यों उछाला। उसके बाद दो घण्टे तक बयान के नाम पर महिला पत्रकार को तरह-तरह  से बरगलाती रहीं। ‘यदि ससुराल वाले तुम्हे मारना चाहते तो कब का मार देते, उन्हे स्लो-पॉयज़न देने की क्या जरूरत है।’ ‘जब तुम्हारी ननद डाक्टर है तो अपने मेडिकल एसोसिएशन से मिलकर तुम्हे  पागल घोषित करवा सकती है, धीमा जहर क्यो देगी?’ ‘तुम्हे वापस अपने बेटे के साथ पंजाब जाकर रहना चाहिए।’ ‘यदि पति तुम्हे मारनें की कोशिश कर रहा है तो तुम उसे डिवोर्स क्यो नही दे देती? ससुर द्वारा लिखी गई प्रापर्टी तो तुम्हारे पास है ही।’ यह कौन सा तरीका है एक पीड़ित पत्रकार से बयान लेने का, हमारी समझ से बाहर है।


बहरहाल, अमित मिश्रा को भी पंजाब से बयान के लिये बुलाया गया, जोकि शुक्रवार को हुआ। सीओ ने पति से क्या बयान लिया ये तो वही बता सकती हैं। लेकिन बयान खत्म होने के बाद आरोप है कि वह फाइनल रिपोर्ट लेकर एसपी ऑफिस गयीं, और वहाँ से लौटकर पत्रकार के आरोपों को निराधार बता दिया। साथ ही मामूली धाराओं (504, 506) में मुकदमा लिखाने के लिये दबाव बनाने लगीं। जिसको सुनकर मीनाक्षी मिश्रा के होश उड़ गए।

हम जानते हैं कि सीओ रैंक की अधिकारी सही और गलत का फैसला करने में सक्षम है। यदि सीओ मीनाक्षी के साथ हो रही जहरखुरानी को निराधार बता रही हैं तो जरूर उनके पास इसका पुख्ता आधार होगा। जहाँ तक हम पत्रकारों की समझ का सवाल है तो हम यह जानते हैं कि जहरखुरानी हुई है या नही इसका फैसला करने के लिये एक ही उपाय है और वो है सक्षम मेडिकल ऑफिसर द्वारा मेडिकल परीक्षण। इसका मतलब सीओ साहिबा ने मिनाक्षी का मेडिकल कराया और उसकी रिपोर्ट में ऐसा कुछ नही आया जिससे महिला पत्रकार के साथ हो रही जहरखुरानी की पुष्टि हो सके। और यदि बिना मेडिकल कराये ही सीओ इस निष्कर्ष पर पहुँच गयी कि वास्तव में मिनाक्षी से जहर खुरानी नही हो रही है तो पत्रकार वर्ग इसको एक ही नाम देगा, पक्षपात! और हम सब जानते है कि पक्षपात की कुछ न कुछ कीमत जरूर होती है।

वही मिनाक्षी ने थाने में हुई पक्षपात की पूरी कहानी विस्तार से बयां की। उनके अनुसार महिला थाने में आरोपित पति अमित मिश्रा के साथ वीआईपी ट्रीटमेंट हुआ। महिला थानें में आरोपी से चाय कॉफी के लिये बार बार आग्रह किया जा रहा था। उस दिन महिला पत्रकार की तबीयत ठीक नही थी, इसलिए वह अपनी मॉ के साथ महिला थानें गई थी, मिनाक्षी का आरोप है कि उसका बयान लेनें से पहले विवेचना अधिकारी नें कक्ष से पत्रकार की मॉ को बाहर कर दिया। जबकि अमित मिश्रा वहॉ मौजूद थे, जो सीओ के सामने ही पत्रकार को गाली-गलौच दे रहे थे, जिस पर सीओ नें इशारे से अमित मिश्रा को ऐसा न करने को कहा, और अमित मान गये। वाह, क्या अंडरस्टैेडिंग है आरोपी और विवेचना अधिकारी के बीच।


मिनाक्षी का यह भी आरोप है कि सीओ ने मीनाक्षी के 10 वर्षीय बेटे अक्षज, जोकि लिखने पढ़ने में सक्षम है, से जहर खुरानी के बाबत सवाल पूछा तो उसने बताया कि कैसे उसने पिता को उसकी माँ के खाने में कोई पाउडर जैसी चीज मिलाते हुए देखा था। अक्षज ने यह भी बयान दिया कि उसके पिता उसे छत पर ले जाकर नीचे फेकने की धमकी देकर डराते थे और उससे कहते थे कि ‘तुम्हारी दूसरी माँ है उसके पास चलो, अपनी माँ को छोड़ दो नही तो यही से फेंक दूंगा।’ इन सब बातों को सीओ साहिबा ने नजरअंदाज करते हुए रिकार्ड करना जरूरी नही समझा। उस पर से तुर्रा यह कि वह बेटे को ही भड़कानें लगीं कि तुम इनके (मिनाक्षी) चक्कर में मत पड़ो तुम्हे आराम से अपनी जिंदगी जीना चाहिये। यहॉ तक कि सीओ साहिबा ने पीड़िता के ऊपर आरोपित पति पर भरोसा करने व पंजाब जाने का दबाव भी डाला। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया क्या तुम्हे प्रॉपर्टी चाहिये। या फिर तुम तलाक देना चाहती हो।


वही सीओ बीनू सिंह के अनुसार जहर खुरानी की जांच के लिये पुलिस नें आरोपित दुकानदारों से नमूने लेकर जांच के लिये भेज दिया है। जिसकी रिपोर्ट आने पर पता चलेगा कि असल में मामला जहरखुरानी का है या नही। विदित हो कि मिनाक्षी मिश्रा ने आरोप लगाया था कि ससुराल पक्ष के द्वारा दुकानदारों के जरिये उसे धीमा जहर देकर जान से मारने की कोशिश की जा रही है, सो मीनाक्षी द्वारा पुलिस की निगरानी में खरीदे गए सामान को फोरेंसिक जांच के लिये भेजा जाना चाहिए था। क्योकि दुकानदार पुलिस टीम को या खाद्य सुरक्षा अधिकारी को जहर मिला खाद्य सामाग्री तो देगा नही। मिनाक्षी के घर का मुआयना करके फॉरेंसिक जांच होनी चाहिये थी। इन सब बातों को विवेचक ने सिरे से नकार दिया और अपना राग अलापती रही। वही एक महिला कांस्टेबल ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि हमनें इनके घर के हर सामान की फॉरेंसिक जांच का ठेका नही लिये हैं। यदि सीओ और उनके मातहत को जहरखुरानी के न होने पर इतना विश्वास है तो मिनाक्षी के घर पर दो घण्टों तक बयान लेने के दौरान पुलिसकर्मियों नें महिला पत्रकार के बहुत कहने के बावजूद उनके घर का पानी तक क्यो नही पिया?

ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि यदि पत्रकार का आरोप सही है और लगातार उसके व उसके बच्चे के साथ जहर खुरानी हो रही है तो पुलिस की ये लापरवाही उनके लिये जानलेवा साबित होगी। साथ ही यदि पुलिस आरोपियों का पक्ष ले रही है तो क्या आरोपियों के हौसले और अधिक बुलंद नही होंगे। आरोपी ने अनेक बार पत्रकार से कहा कि पैसा बोलता है और हमारा गुनाह कभी साबित नही होगा। वही बातें सच साबित होती नजर आ रही। महिला पत्रकार के साथ जहरखुरानी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। और पुलिस आरोपियों को पाक साफ घोषित करने में लगी है।


बिगड़ी महिला पत्रकार की हालत


सुबह 3 बजे के आसपास जब इस पत्रकार के पास मिनाक्षी का फोन आया तो उसकी आवाज से ही लग गया कि उसकी हालत खराब है, उसने फोन पर बताया कि उसे फिर से किसी खाद्य सामाग्री में जहर दिया गया है जिससे उसे लगातार उल्टियां हों रही है। हमनें जब रात में ही पुलिस व एंबुलेंस के इंतजाम के लिए अमेठी प्रशासन से संपर्क करनें की बात कही तो प्रशासन के नकारात्मक रवैये से ऊब चुकी महिला पत्रकार नें मना कर दिया। सुबह महिला पत्रकार की मॉ के उसके घर पहुँच जाने के बाद अस्पताल जाने को किसी तरह तैयार किया। खबर लिखे जाते समय तक जानकारी यह है कि मिनाक्षी मिश्रा फिर से जहरखुरानी का शिकार हो अस्पताल पहुँच चुकीं है। जहॉ उनका उपचार तो हो रहा है लेकिन ऐसे में जब पुलिस को वहॉ सबसे पहले पहुँचना चाहिए था, जानकरी दिए जाने के बावजूद कोई पुलिस अधिकारी वहॉ नही पहुँचा है। विवेचना अधिकारी बीनू सिंह से इस पत्रकार नें स्वंय फोन करके अस्पताल पहुँचकर महिला का मेडिकल मुआयना कराने की बात कही। अस्पताल की जानकरी लेकर विवेचना अधिकारी ने फोन काट दिया। तीन घण्टे बीत चुकने के बाद भी न तो बीनू सिंह अस्पताल पहुँची और न ही कोई दूसरा पुलिस अधिकारी। जबकि जहरखुरानी का शिकार, अस्पताल की बेड पर पड़ी महिला पत्रकार नें स्वंय फोन करके एसपी अमेठी, इंस्पेक्टर अमेठी कोतवाली को घटनाक्रम की जानकरी दी लेकिन लापरवाही का आलम यह कि पुलिस प्रशासन ने यह तक जरूरी नही समझा की जब तक महिला अस्पताल में है तब तक एक कांस्टेबल को ही महिला की सुरक्षा की खातिर तैनात कर दे।


सूत्रानुसार इस समय मिनाक्षी मिश्रा के पति अमित मिश्रा अमेठी में ही अपनी बहन डा० उर्मिला के घर पर हैं। यदि आज महिला पत्रकार के साथ कोई अनहोनी हो गई तो अमेठी प्रशासन को हर हाल में जवाब देना होगा। हम मामले पर नजर रखे हैं और आज रात ही पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल अमेठी पहुँच रहा है, मिनाक्षी के मामले में बरती जा रही लापरवाही के बाबत प्रशासन से सवाल पूछना अभी बाकी है। रही बात आज की घटना कि तो उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ को इस मामले की सूचना भेजी जा रही है।


फिलहाल देखना बाकी है कि जिंदगी की जद्दोजहद में महिला पत्रकार मिनाक्षी मिश्रा के हौसले क्या पस्त होगें और वह ज़िंदगी की जंग हार जाएगी या फिर भारत के संविधान के पहले पन्नें पर लिखा ‘सत्यमेव जयते’ यानि सत्य की जीत होगी? यह आने वाला वक्त बतायेगा।

* * *

Based on telephonic statement given by Meenakshi Mishra and others.

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About Shabab Khan

A Journalist, Philanthropist; Author of 'The Magician', 'Go!', 'Brutal'. Being a passionate writer, I am into Journalism and writing columns, news stories, articles for top media house. Twitter: @khantastix khansworld@rediffmail.com
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