अगर रुपेश की जान गई तो जवाब देना मुश्किल हो जाएगा… चाहे वो पीएम, सीएम हों या शाहरुख, सलमान

यह सच्ची कहानी हैं 41 वर्षीय रुपेश की, जो मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल में ज़िंदगी और मौत के बीच की बारीक सी लकीर पर खड़ा है। उसे लीवर ट्रॉसप्लांटेशन के लिए 25 लाख रूपए की तुरन्त जरूरत है। इन पैसों के लिए रुपेश के भाई अमन पाण्डेय ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर सलमान ख़ान, शाहरुख ख़ान, मुकेश अंबानी जैसे रईसों के दरवाजे खटखटाए। उसनें सोशल मीडिया का प्रयोग करके लगभग हर उस सक्षम नेता, अभिनेता, क्रिकेटर, उद्योगपतियों से मदद मॉगी जिनके बारे में मशहूर है कि वो दिलवाले है और जरूरत पढ़नें पर, किसी मजबूर इंसान की मदद करने से वो नही चूकते।

रूपेश पांडेय बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले हैं जो क्रॉनिक लिवर डिजीज से ग्रसित हैं। यह बीमारी हेपेटाइटिस बी से संबंधित है। वे मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल में एडमिट हैं। वहां के डिपार्टमेंट आॅफ हेपटोलॉजी के हेड डॉ. समीर आर शाह ने अविलंब लिवर ट्रांसप्लांट की एडवाइस दी है। कहा है कि मरीज की जान बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांटेशन ही एकमात्र विकल्प है। लिवर ट्रांसप्लांटेशन में 25 लाख से अधिक रूपये खर्च बताया गया है।

आज के दौर में भारत वर्ष में सबसे बड़े हीरो हैं देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी। रूपेश के भाई ने उन्हे पत्र लिखकर अपनी माली हालात के बारे में बताया, और प्रधानमंत्री राहत कोष से अपने भाई के ईलाज के लिए याचना की। पीएम कार्यालय से राहत तो नही आयी, बल्कि जनरल नॉलेज बढ़ाने के लिए एक पत्र जरूर आया, जिसमे बताया गया था कि इलाज यदि सरकारी अस्पताल या सरकार द्वारा चुनिंदा अस्पताल से होता तो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती थी। हॉ, खेद प्रकट किया गया था। कैसा खेद? ‘रूपेश इलाज के अभाव में मर रहा है तो मरनें दें, नियमत: मदद नही मिलेगी। यही तात्पर्य ही तो निकलता है खेद प्रकट करने का।


चूँकि रुपेश पाण्डेय बिहार का मूल निवासी है, इसलिए अमन ने सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गुहार लगायी, एक नही कई बार। किसी नें जवाब देने की भी जहमत नही उठाई। हताश अमन फिर भी निराश नही हुआ। उसनें सुन रखा था कि शाहरुख ख़ान, सलमान ख़ान, अक्षय कुमार, सचिन तेन्दुलकर, मुकेश अंबानी जरूरतमंदों की मदद करते रहते है। रूपेश का परिवार शाहरुख से आपबीती सुनाने बांद्रा स्थित शाहरुख के घर मन्नत पहुँचा, ख़ान साहब घर से दूर कहीं व्यस्त थे। सलमान से गुहार लगाने उनके घर भी गये तो पता चला बिंईंग ह्युमन कही व्यस्त हैं। जरूर अपने खजाने का फिगर बढ़ाने में कहीं लगे होगें। ‘सत्यमेव जयते’ में दूसरों की तकलीफ पर आंसू बहाते आमिर भाई को बहुत बार देखा। मुझे तो सच के आंसू लगते थे लेकिन मान गये आमिर भाई आपकी एक्टिंग स्किल को। बुरा लगा हो तो कृपया आगे आईये। हम मान जाएगें कि आप के ‘सत्यमेव जयते’ के सेट पर बहाये आंसू सच्चे थे।

इन दूर के सितारों के अलावा भी कई ऐसे लोगों से मदद मॉगी गई जो चुटकी बजा कर एक युवक की जान बचा सकते थे। लेकिन जवाब या तो न में मिला या मिला ही नही। क्या हमारा समाज इंसानियत के नाम पर इस कदर खोखला हो चुका है कि जो लोग विदेशी संस्थाओ को करोड़ो दान करके सुर्खियों में आते है वो करोड़ों का एक छोटा सा हिस्सा मात्र 25 लाख उस अस्पताल को नही दे सकते जो रुपेश का ईलाज कर रहा है।

याद रखे, यदि रुपेश को कल पैसों के अभाव में मौत को गले लगाना पड़ा तो मीडिया जगत हर उस व्यक्ति से सवाल पूछेगा जिससे आज रुपेश का भाई पैसो के लिए गिड़गिड़ा रहा है। जब भी आपकी करोड़ों की दान की खबर हम तक आएगी, हम आपको रूपेश के बारे में याद दिलाएगें, और यह सिलसिला हर फैशन शो, बैंक्युट, फिल्म प्रोमो, आईपीएल, बुक लांच, कार लांच, चुनावी भाषण, रेडशो, महारैली के वक्त भी जारी रहेगा। हम पूछेगे, ‘आप जब जियो जैसी मुफ्त सेवा पूरे देश को दे सकते है तो रुपेश को एक कतरा, जी हॉ, मात्र एक कतरा क्यो नही दिया’… करोड़ो टैक्स भर कर सुर्खियों में आने वाले सलमान साहब हम आप से भी बार-बार पूछेगें कि ‘बिंइग ह्युमन का मतलब क्या होता है?’ मौत की बारीक सी लकीर पर खड़े इंसान को उसके हाल पर ही छोड़ देना यदि बिंईंग ह्युमन होता है तो जानवर भले। मोदी जी, मौत किसी प्रोटोकोल-नियम को समझने वाली नही है। आपके राहत कोष में जो पैसा है वो जनता का है, और वह जनता की मदद के लिए ही है। मदद करने में कैसा नियम, कैसा प्रोटोकॉल हमारी समझ से परे है।

सीनियर बच्चन साहब आप तो मसिहा हैं, कितनों की दुख दर्द में आप चुपके से आये और सारे दुख हर ले गए। रुपेश का भी वक्त दुश्मन बना बैठा है, आप ही एक कदम आगे बढ़ा दें। यही बात हम सचिन तेन्दुलकर से भी पूरी शिद्दत से कहेगें कि आप क्रिकेट के तो भगवान है ही, एक इंसान की जान बचा कर आप वास्तव में भगवान बन जाएगें, रुपेश के परिवार के लिए, हमारे लिए। पूरी मीडिया लॉबी के लिए।


नीतीश जी जरा गौर करे आपकी मीडिया जगत में एक अच्छे इंसान के रूप में साख़ है। आपके अपने राज्य का एक बेटा राह देख रहा है, आपका एक इशारा किसी की जान बचा सकता है। जी हॉ, सिर्फ एक इशारा। कृपया अपनी छवि को धूमिल न करें, मुख्यमंत्री राहत कोष से मोतिहारी के रुपेश की मदद करे। रूपेश-अमन और उनके परिवार के अलावा यदि आपके इस उपकार को याद रखने वाला कोई होगा तो वो मीडिया जगत होगा।

अब भी वक्त है, एक दर-दर भटकते भाई की उम्मीदों को मत तोड़िए, रुपेश को बचाने मे हम अपना सहयोग दे रहे है आप अपना दें. यकीन माने, जब-जब आप मिलेगे, हर मीडिया कर्मी आपको आपकी इंसानियत के लिए सैल्युट करना नही भूलेगा।


रूपेश की पत्नी जूली के मुताबिक वह घर के इकलौते कमाऊ मेंबर हैं। उन्हीं पर सारा दारोमदार है। घर में दो बच्चे राजा व निषा अभी मैट्रिक में हैं। पिता के इस हाल में होने से उनका भविष्य अंधकार में है। उनके बीमार रहने से आय के साधन तो पहले ही बंद हो गए हैं, उपर से घर की जमा पूंजी भी हाथ से निकल गई है।

परिवार वाले बिहार से लेकर मुंबई तक इलाज करा कर थक चुके हैं। घर की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब है। अब तक के इलाज में ही सारे पैसे खत्म हो गये हैं। यहां तक सगे-संबंधियों से कर्ज लेकर भी इलाज कराया गया है। अब कोई कर्ज देने को तैयार नहीं।


लिवर ट्रांसप्लांट में आप रुपेश की मदद करना चाहते हैं, तो रुपेश के भाई अमन पाण्डेय से इस नंबर 9470285969 पर संपर्क कर सकते हैं।

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About Shabab Khan

A Journalist, Philanthropist; Author of 'The Magician', 'Go!', 'Brutal'. Being a passionate writer, I am into Journalism and writing columns, news stories, articles for top media house. Twitter: @khantastix khansworld@rediffmail.com
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One Response to अगर रुपेश की जान गई तो जवाब देना मुश्किल हो जाएगा… चाहे वो पीएम, सीएम हों या शाहरुख, सलमान

  1. Kirtimala says:

    Aapne is story ke liye bahut mehnat kiya h sir Rupesh ki jindgi ager bachti h to isme sabse jyada bda yogdaan aap hi ka hoga

    Like

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