अव्यवस्थाओं के बीच सुर गंगा संगीत महोत्सव जारी, आशा भोसले ने बिखेरा जलवा

सुर गंगा संगीत महोत्सव के मंच पर दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करतीं आशा भोसले, साथ में अनु कपूर और राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी


शबाब ख़ान


वाराणसी: काशी के भैसासुर घाट पर ‘सुर गंगा संगीत महोत्सव’ का आज दूसरा दिन था। गंगा के पानी पर विशाल स्टेज बनाया गया है, स्टेज के बैकग्राऊँड मे काशी विश्वनाथ यानि देवों के देव महादेव की खुले केश में विशालकाय कटआउट लगाया है, महादेव के कटआउट में पीछे से अलग-अलग योग मुद्राओं में उनके दस हाथो को दिखाया गया है। स्टेज के दोनों ओर छोटी-बड़ी मिलाकर कुल पॉच बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई है, क्योकि महोत्सव में आने वाली आम जनता की विशाल भीड़ को सीधे स्टेज दिखाई तो पड़ रहा है लेकिन वहॉ क्या हो रहा है यह देखने के लिए उन्हे बड़ी स्क्रीन का सहारा लेना पड़ेगा। वीआईपी के लिए स्टेज के ठीक सामने सोफे और कुर्सियों की व्यवस्था प्रशासन ने की है। आम जनता के लिए भैसासुर घाट की पत्थर की सीड़ियो पर दरी बिछायी गयी है ओर इस पूरे क्षेत्र को बाकी के क्षेत्र से अलग रखने के लिए बॉस की बल्लियों से विभाजित किया गया है। लाल-नीली बत्तियॉ को अधिकारियों नेतागणों ने अपने वाहन से तो उतार दिया है, लेकिन यहॉ महोत्सव में विशेषाधिकार प्राप्त सज्जनों और आम जनता में फर्क जरूर नजर आया।


समारोह का लुत्फ लेनें के लिए समारोह व्यवस्थकों ने एक कार्ड नुमा पास जारी किया है, जिसे इंटरी पांइट पर तैनात आदमपुर पुलिस के सिपाही चेक करके मेटल डिटेक्टर से आम जनता को प्रवेश दे रहे थे। बताना जरूरी है कि इंटरी पांइट पर दो मेटल डिटेक्टर लगे थे जो शायद आराम फरमाने की मूड में थे। मतलब यह कि दोनो मशीन की हरी बत्तियॉ स्थाई रूप से ऑन थीं। पूछने पर पता चला कि मेटल डिटेक्टर खराब है, आने जाने वालों की तलाशी पुलिस ले नही रही थी, मतलब सुरक्षा में पूरा का पूरा झोल नजर आया। हजारों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दो दर्जन सिपाही और कुछ दरोगा। बता दें कि आज के सुर गंगा संगीत महोत्सव में डीएम और एसएसपी भी मौजूद नजर आये।


अभी मंच पर कुछ शुरुआती म्युजिकल प्रोग्रामस् के बाद विश्व प्रसिद्ध बांसुरी वादक श्री हरिप्रसाद चौरसिया जी को बुलाकर उनका सम्मान अनु कपूर और शहर दक्षिणी से विधायक और राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी द्वारा किया ही जा रहा था कि अचानक धूल भरी आंधी चलने लगी, और आदत से मजबूर पॉवर कारपोरेशन नें बिजली काट दी जिससे मंच के साथ-साथ जनता का सिटिंग ऐरिया भी अंधेरे में गुम हो गया, पॉच मिनट बाद बिजली तो आ गई लेकिन आसमान से बारिश के रूप में पानी ने भी रफ्तार पकड़ ली। ऐसे में तारीफ करनी होगी अन्नु कपूर की जो मंच का संचालन कर रहे थे, उन्होने जनता को अपनी जगह पर बनाए रखनें के लिए कभी शेरो शायरी का सहारा लिया तो कभी हल्के फुल्के जोक्स मारकर पब्लिक का मनोरंजन करते रहे। एक समय तो अन्नु कपूर नें अंधेरे में डूबे मंच से अपने मोबाईल का टार्च जलाकर जनता की ओर दिखाया और बोले, ‘साधो, जला लो अपनी बत्तियॉ’ और पब्लिक गैलरी में बैठे हर व्यक्ति के मोबाईल का टार्च जल उठा। बारिश के बावजूद मंच से न अन्नु कपूर हटे न नीलकंठ तिवारी और न पब्लिक हिली। शायद यही बनारस की खासियत है।


देखें वीडियो: आंधी-पानी के बीच कैसे संभाला अनु कपूर ने स्थिति


बहरहाल, बारिश के बाद विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक गिरिजादेवी का सम्मान हुआ। कुछ और छोटे-मोटे गायन-वादन के इवेंटस् हुए और जैसे ही दस बजा वो घड़ी आ गई जिसका सबको इंतजार था।


जी हॉ, मंच पर आशा भोसले आ चुकी थी, उन्होने मंच से हर हर महादेव का उदघोष किया और बनारसी मानस नें हर हर महादेव के उदघोष से समूचे गगन को भेद दिया। आशा भोसले ने कहा कि यह उनका बनारस आने का पहला मौका है लेकिन अब सोचती हूँ कि पहले बनारस क्यो नही आयी। उसके बाद तो सुर गंगा का समा कुछ यूँ बंधा कि जनता झूम उठी। एक से बढ़कर एक गाने आशा भोसले पेश करती रही और अन्नु कपूर उसमें उनका साथ देते रहे। जब आशा ने फिल्म डॉन का गाना, ‘यह मेरा दिल प्यार का दीवाना’ गाया तो पब्लिक गैलरी में कईयों नें डांस तक करना शुरू कर दिया।


देखें वीडियो: ‘पिया तू अब तो आ जा’ पर परफ़ार्म किया आशा भोसले नें 


इस बीच पास को लेकर पुलिस और आम जनता में नोक झोक होती नजर आयी। एक पास पर दो लोगो की इंट्री थी, लेकिन बनारसी दिमाग की दाद तो पूरा विश्व देता है, खासकर ठगी में। दो लोग पास दिखाकर अंदर जाते और अंदर विराजमान होते ही अपना पास बल्लियों के उस पार खड़े साथी को थमा देते, और वो साथी अपने एक और साथी के साथ अंदर आ जाता, यह क्रम लगातार जारी नजर आया।


जहॉ तक हमारी जानकरी में है, बनारस शहर में बारातों में शोर मचाते हुए जाने वाले डीजे पर पाबंदी है, लेकिन चिराग तले अंधेरा की तर्ज पर ‘सुर गंगा संगीत महोत्सव’ के मेन इंट्रेस पर हमने ऐसी बारात को अटके देखा जिसके आगे बेतुके फिल्मी गानों को कर्कशता की हद तक बजाता 5000 वॉटस के कई स्पीकरस् से लैस डीजे भी था। यह बारात करीब आधे घण्टें तक महोत्सव के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगी रही और आदमपुर पुलिस मूक दर्शक बनी रही। हद तो तब हो गई जब उसी बारात के बीच से बनारस के जिलाधिकारी योगेश्वर मिश्रा की तीन गाड़ियां निकली, किसी नें जरा भी नही सोचा कि यह विश्व स्तर के महोत्सव के मुख्य द्वार के बीचोबीच खड़ी फुल बारात है। बहरहाल जब प्रशासन को आपत्ति नही तो हम क्या होते है आपत्ति जताने वाले। लेकिन आमजन तक इस तरह की व्यवस्था की जानकरी पहुँचाना हमारा काम है सो हम कर रहे है। यह भी बताने योग्य है कि वाराणसी प्रशासन ने महोत्सव में आने वाली दुपहिया वाहनों की पार्किग के लिए कोई व्यवस्था नही की थी। आलम यह था कि हजारो की तादाद दुपहिया वाहन महोत्सव के मुख्य द्वार के बाहर सड़क के दोनो ओर बेतरतीब तरीके से पार्क किये गये थे।


देखें वीडियो: महोत्सव के मुख्य प्रवेश द्वार पर खड़ी बारात, और प्रशासन का मखौल उड़ाता डीजे


इससे पहले महोत्सव के पहले दिन यानि शनिवार को हम भैंसासुर घाट यह देखने पहुँचे कि प्रशासन ने विश्वस्तरीय इंवेंट की कैसी व्यवस्था की है। बनारस की जनता से ‘स्वच्छता’ के नाम करोड़ों वसूल करनें वाले वाराणसी नगरनिगम की पोल खुल गई। हम यह देखकर चौक गये कि जहॉ जनता के बैठने (सीढ़ीयों पर) की व्यवस्था की गई थी वहॉ कूँड़े-कचरे का राज था, सीढ़ीयों यानि आम जनता के आसन पर गंदा पानी बकाया जा रहा था। इन सबसे रूबरू होकर हम और न लिखते हुए यही कहेगें कि “तेरा निज़ाम है, तू चाहे तो शायर की जुबान सिल दे।”


देखें वीडियो: महोत्सव स्थल की साफ-सफाई का नज़ारा आप खुद देख लें

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About Shabab Khan

A Journalist, Philanthropist; Author of 'The Magician', 'Go!', 'Brutal'. Being a passionate writer, I am into Journalism and writing columns, news stories, articles for top media house. Twitter: @khantastix khansworld@rediffmail.com
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