वाराणसी में बीएचयु के पास उजाड़े गए पटरी व्यवासाई, समर्थन में आयें छात्रों पर 107/16 की कार्यवाई

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में अब आम आदमी के लिए जगह नहीं रही। किसी तरह पटरी पर ठेला, खोमचा लगा कर परिवार का जीवन यापन करने वालों को अब जेल की हवा खानी पड़ेगी। उनका जो समर्थन करेगा उन्हें भी पुलिस काल कोठरी में डाल देगी। और तो और उन्हें आसानी से जमानत तक नहीं मिलने वाली। जी हां बात की जा रही है लंका क्षेत्र में बीएचयू की चहारदीवारी से सट कर ठेला खोमचा लगाने वालों की। उन्हें स्मार्ट सिटी के नाम पर पुलिस ने जबरिया उजाड़ दिया। अब उनके घरों के चूल्हे बंद है। विरोध करने पहुंचे लगभग आधा दर्जन छात्रों को भी पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शनिवार को जब कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े लोग ऐसे छात्र जिनकी परीक्षा है उन्हें जमानत कराने पहुंचें तो उनसे एक छात्र की जमानत के लिए पांच-पांच लाख की दो जमानत मांगी गई। बता दें कि इन सभी छात्रों को धारा 107/16 के तहत गिरफ्तार किया गया है। अब लोग प्रति छात्र 10-10 लाख रुपये की जमानत की जुगाड़ में लगे हैं। प्रमुख समाजसेवी बल्लभ पांडेय ने पत्रिका को बताया कि फिलहाल चार छात्रों मृत्यु्ंजय, मुकेश, दिवाकर और संजय की जमानत लेने की कोशिश की जा रही है। शेष 22 लोगों की जमानत की प्रक्रिया सोमवार को होगी।

ठेला पटरी पर पेट पालने के लिए दुकान लगाने को एक अधिकार के रूप में सुनिश्चित करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए वाराणसी की लंका थाने की पुलिस ने पीएसी बल के साथ बेगुनाह दुकानदारों को बेरहमी से पीटते हुए गीरफ्तार कर ऑटो में भर कर थाने ले गए। बीच बचाव करने आई महिलाओ पर भी पुरूष पुलिस वालों द्वारा हाथ उठाया गया और उन्हें भी गिरफ्तार कर थाने ले गए। दुकानदारों को अपना सामान हटाने तक का मौका नही दिया गया और उनका हजारो का नुकसान हुआ।

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नगर निगम और पुलिस की मिली भगत से लंका पर स्थित पटरी व्यवसायियों को पुलिस ने लाठियों के बल पर खदेड़ दिया। इसके अलावा पटरी व्यवसायियों के नेता चिंतामणि सेठ और प्रेम सोनकर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटना से आक्रोशित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लंका थाने का घेराव भी किया।

इस पूरी घटना के विरोध में बीएचयू के शोधार्थी रामायण पटेल, धनंजय सुग्गु, दिवाकर सिंह, मुकेश कुमार समेत दो दर्जन रेहड़ी पटरी वालों को लंका क्षेत्र से हिरासत में ले लिया है.इस घटना से आक्रोशित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लंका थाने का घेराव भी किया।

पटरी व्यवसायियों के लिए संसद में कानून बना हुआ है संसद ने पटरी व्यवसायियों के हित मे फेरी पटरी व्यवसाय अधिनियम 2014 नाम से कानून बना रखा है जो कि इन्हें अपनी आजीविका चलाने का अधिकार देता है। पटरी व्यवसायियों के साथ घटी घटना से शहर के व्यापारियों में भारी आक्रोश है । लगातार कानून का हवाला देने पर भी वाराणसी प्रशासन दरकिनार कर रहा है। इनकी आजीविका का एक मात्र साधन इनसे सुनियोजित तरीके से छीना जा रहा है।

आंदोलन कर रहे शोधार्थी रामायण पटेल का आरोप है कि वाराणसी में अतिक्रमण के नाम पर सबसे ज्यादा उत्पीड़न केवल पटरी व्यवसायियों का ही हो रहा है। पटरी व्यवसायियो का आरोप है कि सनबीम ग्रुप के कई स्कूल बिना किसी अनुमति के अबैध जमीनों पर संचालित हो रहे हैं लेकिन इस पर नगर निगम की चुप है। व्यवसाईयों ने बताया कि प्रशासन से पुनर्वास की मांग भी गई थी लेकिन बिना कोई राहत दिए हमें हमारे धंधे से खदेड़ दिया गया।

बता दें कि बीएचयू अस्पताल की चारदीवारी से सटे लगभग 60 पटरी दुकानदार 50 वर्षों से आबाद थे। अस्पताल के मरीजों और उनके तीमारदारों को दूध, चाय, सस्ता नाश्ता, खाना, जूस आदि उपलब्ध करा रहे थे। इनके परिवारों की आजीविका इन्ही छोटी दुकानों से चलती थी। दो दशक पूर्व उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने इन्हें यहां दुकान लगाने के पक्ष में आदेश दिया था। उच्च न्यायालय में बीएचयू की तरफ से दाखिल शपथपत्र में कहा गया था कि चारदीवारी से लगी चार फीट की जमीन उनकी है और उस पर दुकाने लगने से बीएचयू को कोई आपत्ति नही है। लेकिन अब स्मार्ट सिटी और स्वच्छता अभियान में तहत जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस ने इन सभी दुकानों को उजाड़ दिया। बेहद बर्बरता पूर्वक मय सामान इन दुकानों को रौंद दिया। विरोध करने पर बल प्रयोग भी किया गया। यह सब तब हुआ जब कि राष्ट्रीय फेरी नीति 2007 एवं पथ विक्रेता आजीविका संरक्षण अधिनियम 2014 में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानों को हटाना प्रतिबंधित है। और तो और टाउन वेंडिंग कमेटी की सहमति के बिना किसी पटरी दुकानदार को उजाड़ा नही जा सकता, ये सभी दुकानदार उन 24500 पटरी दुकानदारों में शामिल हैं जिनका सर्वे स्वयं नगर निगम और डूडा ने इस कानून के तहत कराया है। उन्हें सर्वे नम्बर भी दिया है। बावजूद इसके इस प्रकार की बर्बर कार्रवाई की गई। इस सबंध में कुल 26 साथियों की गिरफ्तारी भी की गई है।

Courtesy: Patrika

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About Shabab Khan

A Journalist, Philanthropist; Author of 'The Magician', 'Go!', 'Brutal'. Being a passionate writer, I am into Journalism and writing columns, news stories, articles for top media house. Twitter: @khantastix khansworld@rediffmail.com
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