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यह शहर है हादसों का …

— शबाब ख़ान बेचैन हो उठना हमारा पल भर का सामूहिक-समाजिक बोध है। हरियाणा-पंजाब में फसलों के अवशेष जलाने से निकले धुएं नें दिल्ली पर धुंध की ऐसी चादर ओढ़ाई के गोया हम बेचैन हो उठे। सुर्खियाँ बनी। आम और … Continue reading

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